केन्द्रीय बजट में इस बार भी सब कुछ चंदपूंजीपतियों ‘‘मित्रों’’ के लिये, ‘‘भाईयों-बहनों’’ के लिये पुनः झांसा, जुमला और झुनझुना
किसान, मजदूर, युवा, नौकरीपेशा, महिलाओं और बुजुर्गो में बजट से घोर निराशा। महंगाई, बेरोजगारी कम करने ना कोई फ्रेमवर्क ना ही रोडमैप अमीरी
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