रायपुर 21 मार्च।
छत्तीसगढ़ में पीएम ग्राम सड़क योजना में बड़ा घोटाला!
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत हुए करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला गरमा गया है। विपक्ष के तीखे सवालों के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला?
- वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान ₹139.80 करोड़ की राशि जीएसटी, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी और सुरक्षा निधि के मद में नियमों के विरुद्ध जारी की गई।
- ₹228 करोड़ के दो कार्यों को बिना बजट प्रावधान और वित्त विभाग की अनुमति के शुरू किया गया।
विपक्ष की मांग:
- कांग्रेस विधायक द्वारिकाधीश यादव ने CBI जांच की मांग की।
- विधायकों ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी मंत्री को गलत जानकारी दे रहे हैं।
- सदस्य देवेन्द्र यादव ने जांच के लिए समय सीमा तय करने की मांग की।
सरकार का पक्ष:
- मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि गड़बड़ी पूर्ववर्ती सरकार के समय हुई।
- “पिछली सरकार ने ₹228 करोड़ की राशि बिना बजट आवंटन और वित्त विभाग की मंजूरी के खर्च की।”
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
छत्तीसगढ़ में पीएम ग्राम सड़क योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। सरकार ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। मामला 228 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान का है। विपक्ष ने CBI जांच की मांग की है। पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि गड़बड़ी पूर्ववर्ती सरकार के समय हुई, दोषियों पर कार्रवाई होगी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत हुए करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला गरमा गया है। सदन में विपक्ष के तीखे सवालों के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराने की आधिकारिक घोषणा की है। यह जांच विशेष सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य जनकराम ध्रुव ने वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान ₹139.80 करोड़ की राशि जीएसटी, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी और सुरक्षा निधि के मद में नियमों के विरुद्ध जारी की गई।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा ₹228 करोड़ के उन दो कार्यों को लेकर हुआ, जो बिना किसी बजट प्रावधान और वित्त विभाग की अनुमति के शुरू कर दिए गए थे।
सदन में तीखी बहस और विपक्ष की मांग
चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए:
सीबीआई जांच की मांग: कांग्रेस विधायक द्वारिकाधीश यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच CBI से कराने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि जब वित्त विभाग ने राशि जारी की, तो दोषी अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप: विधायकों ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी स्वयं मंत्री को गलत जानकारी मुहैया करा रहे हैं।
समय सीमा का निर्धारण: सदस्य देवेन्द्र यादव ने जांच के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करने की मांग की, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
सरकार का पक्ष: “अंधेरे में रखकर हुआ काम”
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह गड़बड़ी पूर्ववर्ती समय की है।
”पिछली सरकार के दौरान लगभग ₹228 करोड़ की राशि, जो वास्तव में ठेकेदारों का पैसा (जीएसटी मद) था, उसे बिना किसी बजट आवंटन और वित्त विभाग की मंजूरी के खर्च कर दिया गया। तत्कालीन मंत्रियों और अधिकारियों को संभवतः इसकी जानकारी ही नहीं थी। हमारी सरकार ने आने के बाद ठेकेदारों के भुगतान के लिए वित्त विभाग से विशेष अनुमति मांगी थी।”
— विजय शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री
आगामी कदम
मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में, सरकार का ध्यान इस बात पर है कि आखिर किन परिस्थितियों में बिना अनुमति के इतने बड़े टेंडर जारी किए गए और काम शुरू हुआ।
