राजनांदगांव। स्थानीय ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र ‘ज्ञान मानसरोवर’ में आयोजित 5-दिवसीय समर कैंप “संस्कारों की पाठशाला” का रविवार, 3 मई को हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। पांच दिनों तक चले इस शिविर के अंतिम दिन बच्चों ने अपनी कला और सांस्कृतिक प्रतिभा से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
समापन समारोह के दौरान बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से न केवल बच्चों का कौशल निखरा, बल्कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का सुंदर संदेश भी दिया। पूरा परिसर सकारात्मक ऊर्जा और बच्चों के उत्साह से सराबोर नजर आया।
संस्कार ही जीवन का आधार: राजयोगिनी पुष्पा दीदी
सेवाकेंद्र संचालिका राजयोगिनी पुष्पा दीदी जी ने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद देते हुए कहा कि “ऐसे शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव रखते हैं।” उन्होंने बच्चों को जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर पुरुषार्थ करने की प्रेरणा दी।

नैतिक मूल्यों का विकास जरूरी: पूर्णिमा साहू
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, नवनियुक्त राजगामी संपदा अध्यक्ष पूर्णिमा साहू ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में अनुशासन और आत्मविश्वास जगाने के लिए ‘संस्कारों की पाठशाला’ जैसे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने बच्चों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

कुशल संचालन
पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन ब्रह्माकुमारी प्रभा बहन द्वारा किया गया। उनकी मधुर वाणी और व्यवस्थित संचालन ने समारोह को और भी आकर्षक बनाया। कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों ने भी ब्रह्माकुमारीज़ के इस प्रयास की सराहना की और इसे बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
