सुकमा में आयुष चिकित्सालय बना संजीवनी: पंचकर्म से मिल रहा असाध्य बीमारियों से छुटकारा, आत्मसमर्पित युवाओं को मिला सम्मानजनक रोजगार
रायपुर/सुकमा, 17 मई 2026. सुकमा में आयुष चिकित्सालय बना संजीवनी: पंचकर्म से मिल रहा असाध्य बीमारियों से छुटकारा, आत्मसमर्पित युवाओं को मिला सम्मानजनक रोजगार
छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव और सामाजिक पुनर्वास की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। सुकमा का जिला आयुष चिकित्सालय अब न केवल असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है, बल्कि भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का एक बड़ा केंद्र भी बन चुका है।

पांच साल पुराना माइग्रेन एक हफ्ते में गायब
सुकमा की रहने वाली 39 वर्षीय श्रीमती सीमा सिंह के लिए बीते पांच साल किसी दुःस्वप्न जैसे थे। वे भयंकर माइग्रेन के दर्द से पीड़ित थीं। राहत पाने के लिए उन्होंने बड़े शहरों के चक्कर काटे और एलोपैथी की ढेरों दवाइयां खाईं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
निराशा के बीच गत 4 मई को वे ‘आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक सुकमा’ पहुंचीं। यहाँ अनुभवी चिकित्सक डॉ. मनोरंजन पात्रो की देखरेख में उनका इलाज शुरू हुआ। मात्र एक सप्ताह के आयुर्वेदिक उपचार, सटीक दवाओं और पंचकर्म की ‘शिरोधारा’ पद्धति के चमत्कारी प्रभाव से उनका बरसों पुराना दर्द पूरी तरह गायब हो गया। सीमा सिंह की यह मुस्कान सुकमा जिला प्रशासन के संजीदा प्रयासों की सफलता को बयां करती है।

कलेक्टर अमित कुमार की पहल से बदली तस्वीर
कलेक्टर श्री अमित कुमार के पदभार संभालते ही जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के प्रयास तेज कर दिए गए। इसी कड़ी में जिला आयुष चिकित्सालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया और पारंपरिक व बेहद असरदार ‘पंचकर्म’ चिकित्सा पद्धति की शुरुआत की गई।
प्रशासन की इस विशेष पहल का नतीजा है कि अस्पताल अब रविवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन पूरी मुस्तैदी से संचालित हो रहा है। यहाँ हर दिन औसतन 14 से 15 मरीज डॉ. पात्रो की देखरेख में इलाज कराकर नया और स्वस्थ जीवन पा रहे हैं।
पुनर्वास की अनूठी मिसाल: युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा
यह मुहिम सिर्फ मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण छिपा है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सुकमा के युवाओं के पुनर्वास की भी एक नई कहानी लिखी है।
कलेक्टर की विशेष पहल पर दो आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। इन दोनों युवाओं को इसी आयुष चिकित्सालय में ‘कलेक्टर दर’ पर सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया गया है। कभी गुमराह रहे इन युवाओं के हाथों को काम देकर प्रशासन ने न सिर्फ उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी है, बल्कि जिले में शांति और विकास का एक नया अध्याय भी शुरू किया है।
आज सुकमा का आयुष चिकित्सालय दोहरे उद्देश्यों को पूरा कर रहा है। एक तरफ जहाँ आम नागरिकों को सुकमा की वादियों में ही विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक और पंचकर्म उपचार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भटके हुए युवाओं को देश की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान मिल रहा है।
