हादसे को दी मात: ट्राई साइकिल बनी नर्मदा प्रसाद के स्वावलंबन का सहारा

रायपुर, 22 मई 2026: हादसे के अंधेरे से निकलकर शासन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े नर्मदा प्रसाद: ट्राई साइकिल ने दी जीवन को नई रफ्तार

एक दर्दनाक हादसे के बाद व्हीलचेयर तक सिमट चुकी जिंदगी को शासन की संवेदनशीलता ने एक बार फिर नई उम्मीद और रफ्तार दी है। यह कहानी है रायपुर के रहने वाले नर्मदा प्रसाद यादव की, जो एक गंभीर विद्युत दुर्घटना का शिकार होकर पूर्ण रूप से विकलांग हो गए थे। लेकिन छत्तीसगढ़ शासन की त्वरित मदद ने उनके जीवन में फिर से आत्मनिर्भरता का उजियारा भर दिया है।

हादसे ने छीन ली थी आजीविका, परिवार पर टूटा था दुखों का पहाड़
नर्मदा प्रसाद यादव कुछ समय पहले तक एक प्लास्टिक कंपनी में काम करते थे। वे मेहनत-मजदूरी कर पूरे सम्मान के साथ अपने परिवार की आजीविका चला रहे थे और अपने परिवार की उम्मीदों का इकलौता मुख्य आधार थे। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन कार्यस्थल पर काम करने के दौरान वे एक भीषण विद्युत दुर्घटना (तगड़ा करंट लगने) का शिकार हो गए। इस हादसे ने उन्हें इतनी गंभीर शारीरिक क्षति पहुँचाई कि वे पूरी तरह विकलांग हो गए। उनका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया, जिससे अचानक उनके जीवन की रफ्तार थम गई। इस संकट से पूरा परिवार हताश हो गया और उनके सामने आर्थिक व मानसिक अंधकार छा गया।

प्रशासन की संवेदनशीलता: बिना किसी देरी के मिली ट्राई साइकिल
निराशा के इस गहरे दौर से उबरने के लिए नर्मदा प्रसाद ने हार नहीं मानी और शासन की जनहितैषी योजना के तहत ग्राम पंचायत में ट्राई साइकिल के लिए आवेदन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशील प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। बिना किसी कागजी लेत-लतीफी और प्रशासनिक देरी के, पूरी तत्परता दिखाते हुए नर्मदा जी को तुरंत एक ट्राई साइकिल प्रदान की गई।

खोया आत्मविश्वास लौटा, आर्थिक बोझ भी हुआ कम
शासन के इस छोटे से सहयोग ने नर्मदा प्रसाद के भीतर खोए हुए आत्मविश्वास को दोबारा जगा दिया है। इस ट्राई साइकिल ने उनके जीवन की रुकी हुई रफ्तार को फिर से पटरी पर ला दिया है। अब उन्हें अपनी दैनिक गतिविधियों या कहीं आने-जाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

भावुक होते हुए नर्मदा प्रसाद ने शासन का आभार जताते हुए कहा, “यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि मेरे लिए जीवन जीने की नई उम्मीद है। हादसे के बाद मुझे लगा था कि अब मेरी जिंदगी दूसरों के भरोसे ही कटेगी। लेकिन शासन की योजनाओं ने मुझे फिर से हिम्मत दी है। ट्राई साइकिल मिलने से मैं अब खुद कहीं भी आ-जा सकता हूँ। साथ ही, मेरी पेंशन शुरू होने से परिवार का आर्थिक बोझ भी कम हो जाएगा। संकट के इस समय में हमारे साथ खड़े रहने के लिए मैं शासन और प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त करता हूँ।”

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