रायपुर, 22 मई 2026: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में ईंधन की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। खाद्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए आम जनता को घबराने या पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
12 करोड़ लीटर से अधिक का स्टॉक मौजूद
खाद्य विभाग के मुताबिक 22 मई 2026 की स्थिति में प्रदेश के सभी 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों पर कुल 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का बंपर स्टॉक उपलब्ध है। राज्य को रोजाना तेल कंपनियों से निर्बाध आपूर्ति मिल रही है। अकेले 21 मई को ही प्रदेश में 32.52 लाख लीटर पेट्रोल और 57.60 लाख लीटर डीजल की नई खेप प्राप्त हुई है।
वर्तमान में लखौली, मंदिर हसौद और गोपालपुर स्थित प्रमुख ऑयल कंपनी डिपो से सभी जिलों को उनकी मांग के अनुसार लगातार सप्लाई भेजी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस समय रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारी के कारण ग्रामीण इलाकों में डीजल की मांग बढ़ी है, जिसे देखते हुए आपूर्ति को और तेज कर दिया गया है।
ड्रम, बोतल और जेरीकेन में बिक्री पर तत्काल रोक
भविष्य की सुरक्षा और जमाखोरी को रोकने के लिए राज्य शासन ने 22 मई को एक बड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत अब सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर ड्रम, बोतल, जेरीकेन या किसी भी अन्य खुले बर्तन में ईंधन बेचने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यदि कोई भी पंप संचालक इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे ‘मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005’ के तहत ‘अप्राधिकृत विक्रय’ (अवैध बिक्री) माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ की कड़े प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों और आपातकालीन सेवाओं को मिलेगी राहत
प्रशासन ने खेती-किसानी और आवश्यक नागरिक सुविधाओं का ध्यान रखते हुए इस प्रतिबंध में कुछ जरूरी छूट भी दी है। निम्नलिखित सेवाओं को नियमों के दायरे में रहकर खुले में ईंधन लेने की अनुमति होगी:
- कृषि कार्य: रबी और खरीफ सीजन के लिए किसानों को जरूरत के मुताबिक डीजल मिल सकेगा।
- शासकीय कार्य: जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित किए गए सरकारी निर्माण कार्य।
- आपातकालीन सेवाएं: अस्पताल, एम्बुलेंस और मोबाइल टावर जैसी अति-आवश्यक सेवाएं।
प्रक्रिया: इन सभी श्रेणियों के आवेदकों को संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (SDO) से वेरिफिकेशन कराना होगा। इसके बाद सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए उन्हें निर्धारित मात्रा में ईंधन जारी किया जाएगा।
ड्राई आउट की स्थिति से निपटने की तैयारी
इससे पहले 20 मई को खाद्य सचिव ने सभी प्रमुख ऑयल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की थी। बैठक में सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य के किसी भी कोने में कोई भी पेट्रोल पंप ‘ड्राई आउट’ (ईंधन खत्म होना) नहीं होना चाहिए। जिन पंपों पर स्टॉक कम हो रहा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर तुरंत ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। शासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
