विशेष संवाददाता, रायपुर/खैरागढ़ 24 मई । खैरागढ़ संगीत विवि अब “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय”, सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव को दी हरी झंडी
इतिहास के भ्रम को दूर कर संस्थापक राजपरिवार की विरासत को मिला सम्मान; राज्यपाल के सुझाव और कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के प्रयासों से पूरी हुई प्रक्रिया।
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में स्थित एशिया के पहले और एकमात्र कला एवं संगीत विश्वविद्यालय की पहचान अब आधिकारिक रूप से बदलने जा रही है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 21 मई को इस विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय” करने के प्रस्ताव को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस निर्णय को संस्थापक राजपरिवार की ऐतिहासिक विरासत, त्याग और कला के प्रति उनके समर्पण को दिया गया एक बड़ा सम्मान बताया है।

70 साल पुराना भ्रम होगा दूर
वर्ष 1956 में जब खैरागढ़ रियासत के तत्कालीन राजा महाराजा बीरेंद्र बहादुर सिंह और महारानी पद्मावती देवी ने कला, संगीत और नृत्य के संरक्षण के लिए अपना पूरा राजमहल दान कर दिया था, तब उन्होंने इसका नामकरण अपनी दिवंगत संगीत-प्रेमी पुत्री ‘राजकुमारी इंदिरा’ की स्मृति में किया था।
समय के साथ बोलचाल और सरकारी दस्तावेजों में इसका नाम केवल ‘इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय’ (IKSV) रह गया। इसके कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर यह भ्रम पैदा हो जाता था कि इस विश्वविद्यालय का संबंध देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से है। अब नाम में स्पष्ट रूप से ‘राजकुमारी’ और ‘सिंह’ शब्द जुड़ जाने के बाद न केवल यह भ्रम पूरी तरह दूर हो जाएगा, बल्कि भावी पीढ़ी खैरागढ़ राजपरिवार के इस ऐतिहासिक दान से भी परिचित हो सकेगी。
ऐसे तैयार हुई नाम बदलने की पृष्ठभूमि
- राज्यपाल का सुझाव: नाम परिवर्तन की यह पहल छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के मार्गदर्शन व सुझाव पर शुरू हुई थी। जनवरी में ही इसकी घोषणा की गई थी।
- दस्तावेजों की चुनौती: प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान नाम परिवर्तन से जुड़े दशकों पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों की अनुपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
- कुलपति की विशेष पहल: विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा की विशेष रुचि और सहायक प्राध्यापक डॉ. मंगलानंद झा के कड़े शोध व सहयोग से पुराने शाही रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेज जुटाए गए। इसके बाद ही शासन को ठोस प्रस्ताव भेजा गया।
आगामी विधायी प्रक्रिया
सामान्य प्रशासन विभाग की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट की आगामी बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय अधिनियम, 1956’ में संशोधन के लिए एक संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने और राजपत्र (Gazette) में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद विश्वविद्यालय के डिग्री सर्टिफिकेट, आधिकारिक सील, वेबसाइट और मुख्य द्वारों पर नया नाम प्रदर्शित होने लगेगा।
राजपरिवार और कला जगत में हर्ष
इस ऐतिहासिक फैसले का खैरागढ़ के वर्तमान राजपरिवार, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, देश-विदेश के पूर्व छात्रों और सांस्कृतिक संगठनों ने स्वागत किया है। राजपरिवार के सदस्यों का कहना है कि यह निर्णय राजा बीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती देवी के उस महान त्याग को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने कला की सेवा के लिए अपनी कुल संपत्ति और महल को सौंप दिया था।
