विशेष संवाददाता, रायपुर
छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के किराए में बढ़ोतरी की सुगबुगाहट तेज हो गई है। परिवहन विभाग ने प्रदेश के तमाम बस संचालकों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभाग ने संचालकों की समस्याओं को बारी-बारी से सुना और स्पष्ट संकेत दिए कि अन्य राज्यों के किराया मॉडल्स का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद जल्द ही नई किराया दरों की घोषणा की जाएगी।

पांच साल से नहीं बढ़ा किराया, संचालकों ने मांगा ऑटो-रिवीजन कानून
बैठक में छत्तीसगढ़ बस संचालक संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी खस्ताहाल आर्थिक स्थिति का हवाला दिया। संचालकों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा आखिरी बार वर्ष 2021 में बस किराए में संशोधन किया गया था। बीते पांच वर्षों में डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे बसों का संचालन करना अब घाटे का सौदा बन चुका है।
संचालकों ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखते हुए कहा कि बार-बार किराया बढ़ाने की मांग करने के बजाय एक स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने मांग की कि यात्री किराए को सीधे डीजल के बाजार मूल्य से लिंक कर दिया जाए, ताकि डीजल के दाम बढ़ने या घटने पर किराया अपने आप तय हो सके (फ्यूल सरचार्ज मॉडल)।

स्टेज कैरिज के रूप में चलीं ऑल इंडिया परमिट बसें, तो होगी सीधे जब्ती
परिवहन विभाग ने बैठक में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (All India Tourist Permit) का दुरुपयोग करने वाले ऑपरेटर्स को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। विभाग के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कई संचालक टूरिस्ट परमिट लेकर बसों को ‘स्टेज कैरिज’ (नियमित यात्री बस की तरह स्टॉपेज पर रोककर सवारी बैठाना) के रूप में चला रहे हैं। अब ऐसे वाहनों पर नजर रखने के लिए विशेष उड़नदस्तों का गठन किया जाएगा और पकड़े जाने पर परमिट निरस्त करने व गाड़ी जब्त करने जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महिला और दिव्यांग सुरक्षा: बसों में लगेंगे विशेष बोर्ड
यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और दिव्यांगों की सुरक्षा और सुलभ सफर के लिए विभाग ने बेहद कड़े नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं:
- 25 फीसदी महिला सीट आरक्षित: प्रत्येक यात्री बस की कुल बैठक क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा महिला यात्रियों के लिए आरक्षित रखना होगा। इसके लिए बस के भीतर “महिलाओं के लिए आरक्षित” का बोर्ड बड़े और स्पष्ट अक्षरों में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
- दिव्यांगों के लिए 3 सीटें: हर बस में दिव्यांगजनों के लिए न्यूनतम 03 सीटें आरक्षित रहेंगी। इसके साथ ही बस संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दिव्यांगों को बस में चढ़ने और उतरने में कोई असुविधा न हो।
कंडक्टर-ड्राइवर के लिए यूनिफॉर्म-आईडी अनिवार्य, 2 साल तक रखना होगा टिकट रिकॉर्ड
बसों के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए अब निम्नलिखित नियम लागू होंगे:
- कम्प्यूटरीकृत/पूर्व-मुद्रित टिकट: अब कोई भी परिचालक (कंडक्टर) सादे कागज या हाथ से लिखकर टिकट नहीं दे सकेगा। हर यात्री को प्री-प्रिंटेड टिकट देना अनिवार्य होगा।
- टिकट में दर्ज होगी पूरी कुंडली: टिकट पर परमिट संख्या, परमिट का प्रकार, वाहन क्रमांक, रूट, वसूला गया किराया, टिकट क्रमांक, जारी करने की तारीख और परिचालक का नाम व हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से अंकित होने चाहिए।
- डेटा सुरक्षित रखना जरूरी: बस संचालकों को इन जारी किए गए टिकटों का पूरा रिकॉर्ड न्यूनतम 02 वर्ष तक अपने पास सुरक्षित रखना होगा, ताकि परिवहन विभाग कभी भी इसकी स्क्रूटनी कर सके।
- पहचान पत्र और ड्रेस कोड: ड्यूटी के दौरान चालक और परिचालक को निर्धारित यूनिफॉर्म और नेम-प्लेट के साथ रहना होगा। उनके पास विभाग द्वारा जारी वैध आईडी कार्ड होना चाहिए, जिसमें नाम, पता, फोटो, ड्राइविंग लाइसेंस, बैज नंबर और परमिट की वैधता दर्ज हो।
सुरक्षा मानक: बसों के बाहर लिखना होगा मालिक का नंबर और हेल्पलाइन
आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की मदद के लिए अब हर बस के बाहरी और अंदरूनी हिस्से पर महत्वपूर्ण जानकारियां लिखनी होंगी। वाहन के बाहरी भाग पर बस मालिक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, परमिट संख्या, रूट का विवरण और पुलिस व परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर पेंट करवाना होगा। बस के अंदर भी फ्रंट बोर्ड पर ड्राइवर-कंडक्टर का परिचय पत्र और हेल्पलाइन नंबर लगाना होगा।
इसके साथ ही, तकनीकी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए AIS-119, AIS-063 और AIS-135 के प्रावधानों के तहत आने वाली श्रेणियों की सभी बसों में ‘फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम’ (FDAS) और ‘फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम’ (FDSS) को हमेशा चालू (वर्किंग) कंडीशन में रखना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों की अनदेखी करने वाले बस मालिकों के खिलाफ भारी जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
