मनरेगा और उद्यान विभाग की जुगलबंदी: बासीन गांव में लहलाए आम के पौधे, 99% पौधे जीवित रहने का बना रिकॉर्ड

नारायणपुर/रायपुर, 11 जून 2026

नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद से विकास की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहां के ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित गांव बासीन में सरकारी योजना और किसानों की मेहनत ने मिलकर एक बड़ा कमाल कर दिखाया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार आम के पौधों में से 99 प्रतिशत पौधे आज पूरी तरह जीवित और स्वस्थ हैं। ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के मामले में इसे एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है।

ऐसे मिली इस योजना को कामयाबी

इस बड़ी सफलता के पीछे सरकारी विभागों का तालमेल और सही प्लानिंग है। मुख्य रूप से इन तीन बातों के कारण पौधे जीवित रहे:

  • शानदार पौधे: मनरेगा के तहत बनी सरकारी नर्सरी में उद्यान विभाग ने अच्छी क्वालिटी के ग्राफ्टेड (कलमी) आम के पौधे तैयार किए। इन्हें वित्तीय वर्ष 2025-26 में किसानों के खेतों में लगाया गया।
  • मजबूत बाड़बंदी: पौधों को मवेशियों और बाहरी नुकसान से बचाने के लिए उद्यान विभाग ने खेतों में सामूहिक फेंसिंग (कटीले तारों की बाड़) कराई।
  • एक साल तक देखरेख: योजना में सिर्फ पौधे लगाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया। पौधों को जिंदा रखने के लिए पूरे एक साल तक उनके रख-रखाव और खाद-पानी की पक्की व्यवस्था की गई।

किसानों की मेहनत लाई रंग

इस योजना को कामयाब बनाने में बासीन गांव के किसानों ने दिन-रात एक कर दिया। सरकारी मदद मिलने के बाद किसानों ने खुद आगे आकर पौधों की समय पर सिंचाई की और उनकी देखभाल की। हाल ही में जब अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण किया, तो पाया कि लगभग सभी पौधे सुरक्षित हैं।

भविष्य में मिलेंगे दो बड़े फायदे

गांव का यह मॉडल अब आसपास की दूसरी ग्राम पंचायतों के लिए एक मिसाल बन गया है। आने वाले समय में इस पहल से दो बड़े फायदे होंगे:

  1. किसानों की बढ़ेगी कमाई: जब इन पेड़ों पर आम के फल आएंगे, तो उन्हें बेचकर किसानों को हर साल अलग से मोटी कमाई होगी। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
  2. हरा-भरा होगा पर्यावरण: बड़े पैमाने पर आम के पेड़ लगने से इलाके में हरियाली बढ़ेगी। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और धरती को लाभ पहुंचेगा।

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