छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार के ढाई साल; सुशासन का दावा और चुनौतियां

विशेष संवाददाता, रायपुर
16 जून 2026

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अब तक का कार्यकाल सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं और बस्तर में शांति बहाली पर केंद्रित रहा है। दिसंबर 2023 में राज्य के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद, उन्होंने ‘मोदी की गारंटी’ को पूरा करने की दिशा में तेज़ी से काम किया है।

छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बने लगभग ढाई साल हो चुके हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य ने विकास और शासन के मामले में एक नया रास्ता चुना है। एक सीधे-साधे आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले साय ने अपनी शांत कार्यशैली से राज्य की राजनीति और प्रशासन को प्रभावित किया है। सरकार की प्रमुख नीतियों, सफलताओं और भविष्य की चुनौतियों का एक निष्पक्ष लेखा-जोखा इस प्रकार है:

1. ‘मोदी की गारंटी’ और प्रमुख सफलताएं

मुख्यमंत्री साय ने सत्ता संभालते ही पूर्ववर्ती वादों को अमलीजामा पहनाना शुरू किया। उनके कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

  • किसानों को आर्थिक संबल: सरकार ने कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को धान का बकाया बोनस दिया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत मजबूती मिली है।
  • गरीबों को पक्के मकान: कैबिनेट की पहली ही बैठक में 18 लाख गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना को मंजूरी दी गई। यह ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।
  • बस्तर का नया विजन: नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद से मुक्त बस्तर का खाका पेश किया। अब बस्तर को शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस: छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बना है जहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पूरी तरह से ‘ऑटो-म्यूटेशन’ (स्वचालित नामांतरण) लागू है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले समय में 2 लाख से अधिक मामलों का ऑनलाइन निपटारा हुआ है।
  • यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC): साय सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है।

2. ‘सुशासन तिहार’ और जमीनी जुड़ाव

प्रशासन को जनता के करीब ले जाने के लिए साय सरकार ने ‘सुशासन तिहार 2026’ अभियान चलाया है। इसके तहत जिलों में जनसमस्या निवारण शिविर लगाए जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि सुशासन का मतलब सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर काम का हिसाब देना है।

3. निष्पक्ष राजनीतिक समीक्षा और विपक्ष का नजरिया

जहां एक तरफ सरकार अपनी योजनाओं को बड़ी सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे दूसरे नजरिए से भी देखते हैं:

  • डबल इंजन का फायदा और निर्भरता: मुख्यमंत्री साय ने हमेशा केंद्र और राज्य के अच्छे तालमेल को विकास की वजह बताया है। आलोचकों का मानना है कि राज्य सरकार की अपनी नीतियां पूरी तरह केंद्र की योजनाओं पर ही टिकी हैं।
  • कानून व्यवस्था की चुनौती: बस्तर में बुनियादी ढांचे के विकास और कड़े कदमों के बावजूद, अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा और नक्सली मोर्चे पर स्थायी शांति बहाल करना अब भी एक बड़ी परीक्षा है।
  • वित्तीय प्रबंधन: बड़ी लोक-कल्याणकारी योजनाओं और भारी बोनस वितरण के कारण राज्य के खजाने पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। संतुलित आर्थिक विकास बनाए रखना सरकार के लिए भविष्य में बड़ी चुनौती होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अब तक का कार्यकाल पूरी तरह से कल्याणकारी नीतियों, आदिवासी गौरव और प्रशासनिक पारदर्शिता पर केंद्रित रहा है। उन्होंने आम जनता के बीच विश्वसनीयता बहाल करने में सफलता पाई है। हालांकि, आने वाले समय में राज्य के बढ़ते कर्ज को संभालना, औद्योगिक निवेश को रायपुर से बाहर छोटे जिलों में ले जाना और बस्तर में पूर्ण शांति कायम करना उनके नेतृत्व की असली परीक्षा होगी।

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