अन्नदाताओं के लिए बड़ी खुशखबरी: छत्तीसगढ़ को मिली 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त DAP की संजीवनी!

सीएम विष्णुदेव साय की दिल्ली में की गई पहल लाई रंग; केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का जताया आभार

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  • खाद संकट का ‘द एंड’: यूरिया के बाद अब डीएपी का भी बंपर स्टॉक, खरीफ सीजन में नहीं होगी कोई किल्लत।
  • असरदार डबल इंजन: पीएम मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नड्डा के विशेष सहयोग से तुरंत मिली मंजूरी।
  • समय पर मिलेगी खाद: सीएम साय बोले— किसानों का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, सुचारू रूप से चलेंगे कृषि कार्य।

रायपुर, 5 जुलाई।

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खरीफ की बोनी के बीच केंद्र सरकार से एक बहुत बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विशेष आग्रह पर केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्य के लिए 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी (DAP) आवंटित कर दी है। इस बड़े फैसले पर मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।

दिल्ली का दौरा लाया बड़ा नतीजा

​गौर करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कुछ दिनों पहले नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की जरूरतों का हवाला देते हुए अतिरिक्त खाद की मांग मजबूती से रखी थी। केंद्रीय मंत्री ने किसानों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कदम उठाया, जिसका परिणाम आज इस बड़े आवंटन के रूप में सामने आया है।

अब खाद की कोई टेंशन नहीं, बेफिक्र होकर खेती करें किसान: सीएम साय

​मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि राज्य में यूरिया की सप्लाई पहले से ही भरपूर है। अब इस अतिरिक्त डीएपी के मिल जाने से खाद की उपलब्धता को लेकर सारे संशय खत्म हो गए हैं।

​”हमारी सरकार अन्नदाताओं की सरकार है। डबल इंजन की सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में जुटी है। किसानों को समय पर खाद, बीज और सभी जरूरी चीजें मिलेंगी, ताकि उन्हें खेतों में किसी भी दिक्कत का सामना न करना पड़े।”

— श्री विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

विशेष टिप्पणी

बदलेगा खेती का परिदृश्य

ऐन खेती के सीजन में इतनी बड़ी मात्रा में डीएपी का मिलना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जनजीवन और अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज साबित होगा। इससे न सिर्फ बुआई का काम तेजी पकड़ेगा, बल्कि किसानों को सोसायटियों के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी।

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