सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का अनुकरणीय उदाहरण: विष्णुदेव साय

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने के जज्बे को दर्शाता है — मुख्यमंत्री साय

‘विकसित भारत’ के निर्माण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में धर्मेंद्र प्रधान का योगदान ऐतिहासिक

रायपुर, 25 जुलाई 2026 (विशेष संवाददाता):
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अपने पद से दिए गए त्यागपत्र को सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों, मर्यादा और सिद्धांतों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक मिसाली उदाहरण बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और उनका यह निर्णय राजनीति एवं सार्वजनिक सेवा में उत्तरदायित्व व नैतिक आचरण की नई मिसाल पेश करता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्री प्रधान के दीर्घकालिक सार्वजनिक योगदान की सराहना करते हुए कहा, “श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने जीवन में जिस भी दायित्व को संभाला, उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया। उनकी कार्यशैली, अद्भुत संगठनात्मक क्षमता और देशसेवा के प्रति जज्बा हर जनसेवक के लिए प्रेरणादायी है।”

शिक्षा क्रांति और विकसित भारत के प्रमुख शिल्पकार

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों के दौरान केंद्रीय मंत्री के रूप में श्री प्रधान ने ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है।

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, देश की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी व व्यापक सुधारों, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार से लेकर युवाओं के लिए नए अवसरों के सृजन में धर्मेंद्र प्रधान जी का योगदान अविस्मरणीय रहेगा।”
विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)

उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री धर्मेंद्र प्रधान के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना करते हुए गहरा विश्वास व्यक्त किया कि पद पर रहें या न रहें, राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण और सतत प्रयास भविष्य में भी देश के विकास और जन-कल्याण को एक नई दिशा देते रहेंगे।
सार्वजनिक जीवन में नैतिकता का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक व राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि इसे जनसेवा की मर्यादा का उत्कृष्ट प्रतीक माना जा रहा है।

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