छत्तीसगढ़ के बस्तर में आर्थिकी की नई लहर: मनकी बघेल ने ‘स्पान संवर्धन योजना’ से महज दो महीने में कमाए 15,000 रुपये

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आर्थिकी की नई लहर: मनकी बघेल ने ‘स्पान संवर्धन योजना’ से महज दो महीने में कमाए 15,000 रुपये

मछली पालन से संवर रही बस्तर की तकदीर; पारंपरिक खेती के साथ महिला किसानों के लिए कमाई का नया और सशक्त जरिया बनी शासन की अनूठी पहल

रायपुर, 28 जुलाई:
छत्तीसगढ़ शासन के मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित ‘स्पान संवर्धन योजना’ ग्रामीण अंचल के किसानों के जीवन में आर्थिक खुशहाली का नया सवेरा लेकर आई है। इस कल्याणकारी योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मछली बीज (स्पान) का स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाना, आदिवासी व स्थानीय कृषकों को वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ना और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। इस योजना के तहत शासन द्वारा मत्स्य कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त मछली बीज (स्पान) और नर्सरी जाल पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। साथ ही, तालाब की वैज्ञानिक तैयारी, स्पान संचयन, कुशल नर्सरी प्रबंधन और जल की गुणवत्ता बनाए रखने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
यही योजना अब बस्तर जिले के ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिलाओं के लिए आत्मानुभव और आर्थिक स्वावलंबन का एक ऐसा सशक्त जरिया बन चुकी है, जो सुदूर अंचल की तस्वीर बदल रही है। बस्तर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिवनी की महिला किसान मनकी बघेल ने इस योजना का भरपूर लाभ उठाकर महज दो महीनों के भीतर 15,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई कर पूरे क्षेत्र में सफलता की एक नई मिसाल कायम की है।

सरकारी मदद, तकनीकी मार्गदर्शन और अथक मेहनत का मिला प्रतिफल

मत्स्य पालन विभाग की ओर से इस वर्ष मई माह में मनकी बघेल को मिश्रित प्रजाति के लगभग 25,000 स्पॉन निःशुल्क उपलब्ध कराए गए थे। इसके साथ ही, तालाब की उर्वरता बढ़ाने के लिए आवश्यक खाद और मछलियों के पोषण के लिए आहार के रूप में खल्ली भी प्रदान की गई।
मनकी बघेल ने अपने परिवार के 1 एकड़ क्षेत्र में फैले दो तालाबों में इस स्पॉन का वैज्ञानिक पद्धति से संवर्धन किया। उनके द्वारा नियमित रूप से मछलियों को आहार देने, उनकी कड़ी देखभाल करने और समय-समय पर जाल चलाकर निगरानी रखने के परिणामस्वरूप बेहद कम समय में उच्च गुणवत्ता की मत्स्य अंगुलिकाएं (फिंगरलिंग्स) तैयार हो गईं।
किसानों की राह आसान करने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने तैयार मत्स्य बीज को सुरक्षित बाजार तक पहुंचाने हेतु ऑक्सीजन सिलेंडर, विशेष पॉलिथीन बैग, बोरी और जाल जैसी जरूरी सामग्री भी पूरी तरह निःशुल्क मुहैया कराई, जिससे इस पूरी प्रक्रिया में किसानों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

कम समय में मिला बम्पर मुनाफा, अंगुलिका उत्पादन बना वरदान

मनकी बघेल के भतीजे सुखलाल बघेल ने अपने परिवार की इस सफलता को साझा करते हुए बताया कि अब तक लगभग 30 किलोग्राम मत्स्य अंगुलिकाएं 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बाजार में बेची जा चुकी हैं। इससे उनके परिवार को 15,000 रुपये की सीधी और शुद्ध आय प्राप्त हुई है।
राहत और उत्साह की बात यह है कि वर्तमान में भी तालाब में लगभग 50 किलोग्राम अंगुलिकाएं बिक्री के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिनसे निकट भविष्य में और अधिक मुनाफे की उम्मीद है। सुखलाल के अनुसार, पारंपरिक मछली पालन की तुलना में यह वैज्ञानिक अंगुलिका उत्पादन किसानों के लिए कहीं अधिक लाभदायक और कम लागत में ज्यादा रिटर्न देने वाला साबित हो रहा है।

खेती के साथ मत्स्य पालन से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

बघेल परिवार पारंपरिक कृषि के साथ-साथ अब आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाकर अपनी आय को चौतरफा बढ़ा रहा है। यह परिवार कुल 7 एकड़ भूमि में खरीफ सीजन के दौरान उन्नत किस्मों की धान की खेती करता है, वहीं रबी सीजन के दौरान नदी किनारे 2 एकड़ भूमि में मक्का व विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसल उगाता है।
इस पहले ही प्रयास में मिली शानदार सफलता से पूरा परिवार बेहद उत्साहित है। बघेल परिवार ने अब दृढ़ संकल्प लिया है कि वे आने वाले वर्ष में अंगुलिका उत्पादन का और अधिक विस्तार करेंगे, ताकि कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी अपने परिवार की आजीविका और आय का एक मजबूत मुख्य स्तंभ बनाया जा सके।

विशेष संपादकीय टिप्पणी: ग्रामीण स्वावलंबन का नया ब्लूप्रिंट

“मनकी बघेल की यह सफलता केवल एक आंकड़ा मात्र नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शी नीतियों और ग्रामीण अंचल के अटूट परिश्रम का एक जीवंत दस्तावेज है।”
पारंपरिक खेती के भरोसे जीवनयापन करने वाले आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में महिलाओं का इस प्रकार वैज्ञानिक मत्स्य पालन से जुड़ना और कम समय में अपनी आय बढ़ाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यदि शासन की योजनाएं धरातल पर सही क्रियान्वयन के साथ पहुंचें, तो ग्रामीण भारत अपनी तकदीर खुद लिखने में पूरी तरह सक्षम है। ‘स्पान संवर्धन योजना’ ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर संसाधनों का उचित उपयोग और तकनीकी सहयोग मिलने पर छोटे किसान भी उद्यमी बन सकते हैं। मनकी बघेल की यह कहानी छत्तीसगढ़ के अन्य किसानों के लिए एक अचूक मार्गदर्शिका है जो यह सिखाती है कि कृषि विविधीकरण (Diversification) ही ग्रामीण समृद्धि की असल कुंजी है।

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