लेखिका जया जादवानी बनीं जन संस्कृति मंच रायपुर की अध्यक्ष

रायपुर.छत्तीसगढ़ में जन संस्कृति मंच की रायपुर इकाई का पुर्नगठन कर दिया गया है. तीन अगस्त रविवार को शंकर नगर स्थित अपना मोर्चा के कार्यालय में आयोजित की गई एक बैठक में लोकतंत्र, न्याय और समानता के लिए कार्यरत प्रतिबद्ध लेखिकाओं और संस्कृतिकर्मियों के हाथों में जसम रायपुर की कमान सौंपी गई. समाज की तरह कला और साहित्य के क्षेत्र में भी पुरुष वर्चस्व को तोड़ते हुए जसम रायपुर ने स्त्री लेखिकाओं और कलाकारों की अग्रणी नेतृत्वकारी भूमिका को स्वीकार करते हुए संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान दिया है. देश की नामचीन लेखिका जया जादवानी को सर्व सम्मति से रायपुर जसम का अध्यक्ष चुन लिया गया है. बताना लाजिमी होगा कि अपनी विशिष्ट लेखन शैली के चलते जया जादवानी ने अपना एक खास मुकाम बनाया है. उनकी अब तक पच्चीस से ज्यादा किताब प्रकाशित हो चुकी हैं और हर किताब किसी न किसी रुप में विमर्श के केंद्र में रही हैं.

प्रसिद्ध लेखिका वंदना कुमार एवं दिलशाद सैफी को उपाध्यक्ष बनाया गया है, वहीं लोककला के क्षेत्र में कार्यरत डॉ.संजू पूनम को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. सांस्कृतिक टीम की जिम्मेदारी अंचल की ख्यातिलब्ध शास्त्रीय गायिका वर्षा बोपचे और सुनीता शुक्ला को दी गई है.

युवा आलोचक इंद्र कुमार राठौर दूसरी बार सचिव बनाए गए जबकि युवा कवि प्रोफेसर अजय शुक्ला सह-सचिव नियुक्त किए गए हैं.

छत्तीसगढ़ में जसम के समन्वयक नामचीन आलोचक प्रोफेसर सियाराम शर्मा और संस्कृतिकर्मी राजकुमार सोनी को संरक्षक नियुक्त किया गया है.

नई कार्यकारिणी में जसम की राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी में शामिल लेखिका रूपेंद्र तिवारी,लेखक-पत्रकार समीर दीवान, सनियारा खान,युवा आलोचक भुवाल सिंह ठाकुर, नामचीन शायर जावेद नदीम नागपुरी, आलिम नकवी, सिरिल साइमन, आफ़ाक अहमद, मीसम हैदरी,
मोहित जायसवाल, नरोत्तम शर्मा,
डॉ. रामेश्वरी दास, अखिलेश एडगर, भागीरथी वर्मा, नरेश कुमार साहू, प्रतीक कश्यप और चित्रकार सर्वज्ञ नायर को शामिल किया गया है.

लेखक और संस्कृतिकर्मी जाएंगे गांव

अभी हाल के दिनों में जसम से जुड़े सदस्यों ने मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर स्कूली बच्चों के बीच ईदगाह, बूढ़ी काकी और पंच परमेश्वर पर चित्र निर्माण का एक कार्यक्रम आयोजित किया था. जसम के इस अभिनव आयोजन को देश व्यापी सराहना मिली थीं. अब जसम से जुड़े लेखकों और संस्कृतिकर्मियों ने गांव में जाकर ग्रामीणों और बच्चों के सुख-दुख, हंसी-खुशी में शामिल होने का मन बनाया है.बैठक में जसम के सदस्यों ने यह भी तय किया कि साहित्य-संस्कृति और कला से जनता के जुड़ाव के लिए प्रतिबद्ध प्रयास को सतत जारी रखा जाएगा.

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