आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है।
आज बस्तर में 210 नक्सली, जो कभी माओवाद के झूठ में उलझकर वर्षों तक अंधेरी राहों पर भटकते रहे, उन्होंने संविधान और हमारी नीतियों पर विश्वास जताते हुए विकास की मुख्यधारा को अपनाया है। आज उन्होंने अपने कंधों से बंदूक उतारकर, अपने हाथों में संविधान को थामा है।
आज बस्तर में बंदूकें छोड़कर सुशासन पर विश्वास जताने वाले इन युवाओं से मुलाकात मेरे जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोष देने वाले पलों में से एक है।

हमारी “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी योजनाएँ, विश्वास और परिवर्तन का आह्वान है। इन्हीं नीतियों की ताकत है कि आज नक्सली हमारी सरकार की विश्वास और विकास की प्रतिज्ञा को स्वीकार कर रहे हैं, बंदूक छोड़कर आत्मसमर्पण की राह चुन रहे हैं।

आज का यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है। यह क्षण हमारी सरकार की उपलब्धि से बढ़कर, छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण भविष्य का शिलान्यास है। हमारी सरकार आत्मसमर्पितों के पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।
डबल इंजन सरकार की प्रतिज्ञा है, छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की और यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में यह प्रतिज्ञा पूर्ण हो रही है।
जय हिंद!
जय छत्तीसगढ़!
-श्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
