बलरामपुर-रामानुजगंज | 06 मई 2026
छत्तीसगढ़ के वनांचलों में रहने वाली विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में ‘सुशासन’ और सरकारी संवेदनशीलता किस तरह रोशनी फैला रही है, इसकी एक जीवंत मिसाल बलरामपुर जिले के ग्राम गोविंदपुर (सरगड़ी) में देखने को मिली है। यहाँ रहने वाले एक दृष्टिबाधित पहाड़ी कोरवा दंपति, कृष्णा और अनिता ने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो शारीरिक अक्षमताएं प्रगति की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।

पीएम मोदी ने सौंपी सपनों के घर की चाबी
कृष्णा और अनिता के जीवन का सबसे यादगार क्षण राज्य स्थापना की रजत जयंती (2025) के अवसर पर आया। इस ऐतिहासिक मौके पर स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कृष्णा को प्रधानमंत्री जनमन योजना और पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्मित पक्के घर की चाबी सौंपी। सालों तक कच्चे और असुरक्षित मकान में रहने के बाद, पक्का घर मिलना इस दंपति के लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन की नई शुरुआत है।
मनरेगा बना आर्थिक स्वावलंबन का आधार
पक्के घर ने जहाँ सिर पर सुरक्षित छत दी, वहीं महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) ने इस परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। अपनी शारीरिक चुनौती को दरकिनार करते हुए कृष्णा और अनिता मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों को पानी पिलाने का कार्य करते हैं।
शासकीय आंकड़ों के अनुसार, इस दंपति को वर्ष 2024-25 में 86 दिनों का रोजगार प्राप्त हुआ, वहीं चालू वित्तीय वर्ष में भी अब तक 14 दिनों का काम मिल चुका है। नियमित मजदूरी मिलने से अब उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
संवेदनशीलता से बदला जीवन
गोविंदपुर का यह दंपति आज क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। कृष्णा का कहना है कि सरकार की इन योजनाओं ने न केवल उनकी असुरक्षा को दूर किया है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर भी दिया है। यह कहानी दर्शाती है कि शासन की योजनाएं जब समाज के ‘अंतिम व्यक्ति’ तक पहुँचती हैं, तभी सुशासन का असली उद्देश्य सार्थक होता है।
बलरामपुर के जिला प्रशासन का कहना है कि विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) के लिए चलाई जा रही विशेष योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन उनकी प्राथमिकता है, ताकि कृष्णा और अनिता जैसे अन्य परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
