ऐतिहासिक बदलाव: जहाँ कभी लगती थी ‘जन-अदालत’, वहाँ अब ‘सुशासन तिहार’ से पहुँच रहा विकास
बीजापुर/रायपुर, 08 मई 2026: माओवाद के साये से बाहर निकलकर बस्तर के दूरस्थ अंचलों में अब लोकतंत्र और सुशासन की नई सुबह दिखाई दे रही है। इसका जीवंत उदाहरण बीजापुर जिले का अत्यंत सुदूर ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर बना, जहाँ गुरुवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर “सुशासन तिहार-2026” के तहत एक विशाल जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया।

यह वही इलाका है जो कभी माओवादियों की ‘जनताना सरकार’ और उनकी खौफनाक ‘जन-अदालतों’ के लिए जाना जाता था। लेकिन अब यहाँ पहली बार समूचा प्रशासनिक अमला एक साथ ग्रामीणों के द्वार पर पहुँचा।
भय की जगह अब उम्मीदों का सैलाब
शिविर में केवल पुजारी कांकेर ही नहीं, बल्कि मारुड़बाका, नेलाकांकेर, संकनपल्ली, ईलमिड़ी, लंकापल्ली और आवापल्ली सहित लगभग 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण भारी संख्या में उमड़े। माओवाद के खौफ को पीछे छोड़ते हुए बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग अपनी स्थानीय बोली (गोंडी/हल्बी) में सरकारी योजनाओं की जानकारी लेते और आवेदन भरते नजर आए।

मौके पर हुआ शिकायतों का निपटारा
प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाते हुए शिविर में प्राप्त आवेदनों में से 29 समस्याओं का तत्काल निराकरण किया गया। शेष आवेदनों के लिए संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर में प्रमुख रूप से निम्नलिखित विभागों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:

- शिक्षा और स्वास्थ्य: बच्चों के टीकाकरण और बुनियादी सुविधाओं पर जोर।
- जल जीवन मिशन और क्रेडा: घर-घर पेयजल और सौर ऊर्जा की जानकारी।
- कृषि, उद्यानिकी और वन: किसानों को उन्नत खेती और वनोपज के सही दाम दिलाने की योजनाएं।
- राजस्व और पंचायत: जमीन संबंधी विवादों और राशन कार्ड जैसे मुद्दों का समाधान।
बाजारों में लौटी रौनक, चेहरों पर मुस्कान
मुख्य अतिथि और जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने इस अवसर पर कहा, “यह मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि आज प्रशासन उस दहलीज तक पहुँचा है जहाँ कभी साप्ताहिक बाजार तक बंद हो जाते थे। सुशासन तिहार ने ग्रामीणों के मन से भय निकालकर विश्वास भरा है।”
विकास की मुख्यधारा से जुड़ता पुजारी कांकेर
कभी माओवाद के गढ़ रहे इन क्षेत्रों में प्रशासन की यह सक्रियता एक बड़े बदलाव का संकेत है। ग्रामीणों का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि वे अब बंदूक की जगह विकास और हिंसा की जगह अधिकारों को चुन रहे हैं। “सुशासन तिहार-2026” केवल एक शिविर नहीं, बल्कि बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की पहुँच का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
