जशपुर का ‘वेस्ट टू बेस्ट’ मॉडल: दुलदुला इको पार्क

रायपुर/जशपुर, 08 मई 2026

कबाड़ से सजा जशपुर का ‘इको पार्क’: ‘वेस्ट टू बेस्ट’ की मिसाल बना दुलदुला का यह पर्यटन केंद्र

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नवाचार और पर्यावरण संरक्षण की एक नई इबारत लिखी जा रही है। दुलदुला जनपद पंचायत के समीप विकसित किया गया “इको पार्क” आज न केवल स्थानीय पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है, बल्कि यह “वेस्ट टू बेस्ट” (कबाड़ से जुगाड़) की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाला एक उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरा है।

कबाड़ को मिला नया जीवन

इस पार्क की सबसे अनूठी विशेषता इसका निर्माण और सजावट है। यहाँ प्रशासनिक सूझबूझ और कलाकारों की मेहनत से बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को कलाकृतियों में बदल दिया गया है।

  • सजीव कलाकृतियां: लोहे के बेकार पार्ट्स और कबाड़ का उपयोग कर घोड़ा, मयूर (मोर) और तितली जैसी सजीव लगने वाली आकृतियां बनाई गई हैं।
  • टायरों का कायाकल्प: पुराने और फेंके गए टायरों को फेंकने के बजाय उन्हें चमकीले रंगों से रंगकर आकर्षक झूलों का रूप दिया गया है।

सामुदायिक विकास का केंद्र

इको पार्क को केवल एक दर्शनीय स्थल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक संपूर्ण सामुदायिक मनोरंजन केंद्र के रूप में ढाला गया है:

  1. हेल्थ और फिटनेस: युवाओं और फिटनेस के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए यहाँ आधुनिक ओपन जिम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
  2. बच्चों का कोना: बच्चों के खेलने के लिए रंग-बिरंगे झूले और विभिन्न खेल सामग्रियां लगाई गई हैं, जो उन्हें कबाड़ से बनी कला के प्रति जागरूक भी करती हैं।
  3. पारिवारिक मेल-जोल: शांत वातावरण और सुंदर दृश्यों के कारण यह स्थान परिवारों के लिए शाम बिताने और पिकनिक मनाने का सबसे पसंदीदा स्पॉट बन गया है।

सतत विकास की ओर कदम

दुलदुला का यह इको पार्क यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो अनुपयोगी वस्तुओं से भी सुंदरता और उपयोगिता का सृजन किया जा सकता है। यह मॉडल न केवल कचरा प्रबंधन में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

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