रायपुर, 11 मई 2026: मेधावी छात्रों के सपनों को लगी ‘नवाचार’ की विंग्स: मुख्यमंत्री की पहल पर टॉपरों ने स्टेडियम में जिया आईपीएल का रोमांच
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न केवल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है, बल्कि प्रदेश के प्रतिभावान युवाओं के उत्साहवर्धन के लिए नित नए प्रयोग भी कर रही है। इसी कड़ी में कल नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब प्रदेश की दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में प्रावीण्य सूची (Merit List) में स्थान बनाने वाले मेधावी छात्र-छात्राएं ‘वीआईपी’ मेहमान बनकर आईपीएल मैच का लुत्फ उठाने पहुंचे।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम मुंबई इंडियंस: उत्साह और सम्मान का मेल
राज्य शासन की विशेष पहल पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 18 मेधावी विद्यार्थियों को नवा रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम लाया गया। अवसर था रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच खेले गए हाई-वोल्टेज मुकाबले का। स्टेडियम की गूँज और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सितारों को अपनी आँखों के सामने खेलता देख इन विद्यार्थियों के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह राज्य सरकार के उस उद्देश्य को सफल कर रही थी, जिसका लक्ष्य शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास और प्रोत्साहन प्रदान करना है।

छात्रों के अनुभव: टीवी से निकलकर सीधे ‘लाइव’ मैदान तक
हायर सेकेंडरी परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले बलौदाबाजार-भाटापारा के जिज्ञासु वर्मा (सरस्वती शिशु मंदिर, पलारी) के लिए यह अनुभव किसी सपने जैसा था। जिज्ञासु ने बताया, “क्रिकेट मेरा जुनून है। मैंने हमेशा टीवी पर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को देखा है, लेकिन आज पहली बार इतने भव्य स्टेडियम की ऊर्जा महसूस की। मुख्यमंत्री जी का यह प्रयास हमें यह संदेश देता है कि कड़ी मेहनत का फल हमेशा सुखद और गौरवशाली होता है।”

वहीं, कांकेर जिले के सुदूर अंचल से आए स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र यश ख्रोबागढ़े ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को सामने खेलते देखना उनके मनोबल को सातवें आसमान पर ले गया है। उनके अनुसार, शासन की यह पहल विद्यार्थियों को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।
प्रोत्साहन की नई नीति: शिक्षा और खेल का संगम
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की इस पहल का मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्रों को एक “रिवॉर्ड” (पुरस्कार) देना था, ताकि वे समाज के अन्य छात्रों के लिए रोल मॉडल बन सकें। सरकार का मानना है कि इस तरह के एक्सपोजर से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें बड़े सपने देखने की प्रेरणा मिलती है।
प्रावीण्य सूची के इन सितारों ने बढ़ाया मान
यद्यपि प्रदेश के कई मेधावियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है, इस विशेष मैच के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:
- जिज्ञासु वर्मा (प्रथम स्थान, 12वीं – बलौदाबाजार)
- यश ख्रोबागढ़े (10वां स्थान, 12वीं – कांकेर)
- मुस्कान साहू (प्रावीण्य सूची, 10वीं – धमतरी)
- आर्यन सिंह (प्रावीण्य सूची, 12वीं – रायपुर)
( शासन द्वारा चयनित सभी 18 विद्यार्थियों में राज्य के आदिवासी अंचलों से लेकर मैदानी जिलों तक का प्रतिनिधित्व रहा।)
लक्ष्यों की ओर बढ़ते कदम: भविष्य की प्रेरणा
स्टेडियम में मैच देखने के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल चौके-छक्कों का आनंद लिया, बल्कि खिलाड़ियों के अनुशासन और उनके खेल के प्रति समर्पण को भी करीब से देखा। जशपुर जिले से आई एक छात्रा ने भावुक होते हुए कहा, “आज हमें लग रहा है कि हमारी मेहनत का सम्मान सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में हो रहा है। अब हम अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE/NEET/UPSC) के लिए और भी ज्यादा मेहनत करेंगे।”
शिक्षा जगत में सराहना
मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल की सराहना प्रदेश के शिक्षाविदों और अभिभावकों ने भी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना’ के तहत किए जा रहे ये नवाचार छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में एक नया उत्साह फूँक रहे हैं। इससे न केवल ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी, बल्कि छात्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी पैदा होगी।
इस यादगार अनुभव के बाद सभी 18 विद्यार्थियों को शासकीय वाहनों से ससम्मान उनके गृह जिलों के लिए रवाना किया गया। जाते-जाते सभी के चेहरों पर एक ही संकल्प था—“अगली बार भी मेहनत करेंगे और फिर से छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगे।”
