मुंगेली में सामाजिक समरसता की नई बयार: सीएम साय ने किया बाबा गुरु घासीदास और डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाओं का अनावरण

मुंगेली 11 मई 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मुंगेली में डॉ. अंबेडकर और बाबा गुरु घासीदास की प्रतिमाओं का किया अनावरण

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज मुंगेली जिले के प्रवास पर रहे। सुशासन तिहार के तहत आयोजित ‘समाधान शिविरों’ के माध्यम से सुशासन को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री ने नगर के विभिन्न चौक-चौराहों पर महापुरुषों एवं संतों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस दौरान पूरा शहर उत्साह, श्रद्धा और गौरव के वातावरण में सराबोर नजर आया।

संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर को किया नमन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के समीप भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया। बाबा साहब को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान के माध्यम से उन्होंने देश को समानता और न्याय की जो आधारशिला दी है, वह अद्वितीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार बाबा साहब के ‘अंतिम व्यक्ति के उत्थान’ के विचार को अपना ध्येय मानकर काम कर रही है।

गुरु घासीदास बाबा के सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान

इसके पश्चात, मुख्यमंत्री दाऊपारा पहुंचे, जहाँ उन्होंने सत्य और अहिंसा के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश ने समाज को एकता और भाईचारे के सूत्र में पिरोया है। उनकी विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक उनके आदर्शों को पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है।

समाधान शिविरों से सुशासन को मजबूती

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित समाधान शिविरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जनता तक पहुँचे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाए।

गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और विधायक श्री पुन्नू लाल मोहले विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और भारी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

मुख्यमंत्री के इस प्रवास और प्रतिमाओं के अनावरण को मुंगेली की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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