सब्जी उत्पादन का नया कीर्तिमान: उद्यानिकी विभाग के सहयोग से किसान महेश ने कमाया बंपर मुनाफा

बिलासपुर/बिल्हा 12 मई उद्यानिकी विभाग की मदद से बिलासपुर के किसान महेश कश्यप ने रचा इतिहास, सब्जी उत्पादन से कमाया 15 लाख का शुद्ध लाभ

: परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और कम होते मुनाफे से जूझ रहे किसानों के लिए बिलासपुर जिले के ग्राम कछार (बिल्हा) के किसान श्री महेश कश्यप एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं। आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के मेल ने उनकी तकदीर बदल दी है।

परंपरागत खेती से आधुनिकता का सफर
कभी सामान्य फसलों पर निर्भर रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की ‘समेकित उद्यानिकी विकास योजना’ के तहत वैज्ञानिक पद्धति को अपनाया। विभाग से मिले अनुदान की मदद से उन्होंने 2 हेक्टेयर क्षेत्र में न केवल पौधरोपण किया, बल्कि फेंसिंग और उन्नत खेती का मॉडल तैयार किया।

तकनीक ने आसान बनाई राह
महेश कश्यप की सफलता में आधुनिक तकनीकों का बड़ा योगदान है:

  • ड्रिप सिंचाई: इससे पानी की बचत हुई और पौधों को सटीक पोषण मिला।
  • मल्चिंग तकनीक: मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने में सफलता मिली।
  • जैविक खाद: वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भारी बढ़ोतरी हुई।

साढ़े चार एकड़ में बैंगन और अंतरवर्ती फसलों का जादू
महेश ने अपने साढ़े चार एकड़ खेत में मुख्य रूप से बैंगन की खेती की है, जिसके साथ उन्होंने कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों को अंतरवर्ती फसल (Intercropping) के रूप में उगाया।

लागत से दोगुना मुनाफा
महेश कश्यप के अनुसार, खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई है। वर्तमान में उन्हें 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है। सब्जियों की बिक्री से उन्हें लगभग 14 से 15 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है, जो उनकी आर्थिक स्थिति में एक क्रांतिकारी बदलाव है।

किसानों के लिए प्रेरणा
अपनी सफलता से उत्साहित महेश आज अन्य किसानों को संदेश दे रहे हैं कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए और आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए, तो खेती को घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक बेहद लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की इस पहल ने ग्रामीण अंचल में समृद्धि की एक नई इबारत लिख दी है।

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