छत्तीसगढ़ में महिलाओं की आर्थिक आजादी का आधार बने ‘वन धन विकास केंद्र’, 55 हजार महिलाओं को मिला रोजगार

रायपुर, 14 मई 2026:
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में वन धन विकास केंद्र महिलाओं की आर्थिक आजादी और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वय से इन केंद्रों ने आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव लाया है।

155 केंद्रों का मजबूत नेटवर्क

राज्य में प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और प्रधानमंत्री जनमन योजना के सफल क्रियान्वयन से अब तक कुल 155 वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।

  • सामान्य क्षेत्र: 139 केंद्र सुचारू रूप से संचालित हैं।
  • विशेष क्षेत्र: 16 केंद्र विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय समूह (PVTG) क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

संग्रहण से प्रसंस्करण तक का आधुनिक सफर

इन केंद्रों ने पारंपरिक लघु वनोपज संग्रहण की पुरानी व्यवस्था को आधुनिक प्रसंस्करण (Processing) तकनीक से जोड़कर एक नई दिशा दी है।

  • यहाँ वनांचल से औषधियों और लघु वनोपजों का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण होता है।
  • संग्रहण के बाद केंद्रों पर ही प्राथमिक प्रसंस्करण किया जाता है।
  • उच्च गुणवत्ता वाले विभिन्न हर्बल उत्पादों का निर्माण स्थानीय स्तर पर ही हो रहा है।
  • इस पूरी कवाSubयद से हजारों महिलाओं को उनके घर और गांव के समीप ही स्थायी रोजगार मिल रहा है।

आंकड़ों में वन धन केंद्रों की सफलता

पिछले पांच वर्षों में इन केंद्रों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं:

  • समूहों की भागीदारी: लगभग 4,900 महिला स्व-सहायता समूह इन केंद्रों से सीधे जुड़े हैं।
  • महिला कार्यबल: करीब 55,000 महिला सदस्य गांवों और स्थानीय हाट-बाजारों में संग्रहण एवं प्रसंस्करण के कार्य में जुटी हैं।
  • वितरित कमीशन: लघु वनोपज संग्रहण कार्य के लिए महिलाओं को अब तक लगभग 4 करोड़ रुपये का कमीशन बांटा जा चुका है।

मूल्य संवर्धन (Value Addition) से बढ़ी आमदनी

सिर्फ प्राथमिक संग्रहण ही नहीं, बल्कि उत्पादों की री-पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • हर्बल निर्माण: लगभग 1,300 महिला समूहों की 17,000 महिलाएं सीधे हर्बल उत्पाद बनाने के काम में लगी हैं।
  • अतिरिक्त लाभांश: हर्बल उत्पाद निर्माण के इस विशिष्ट कार्य के लिए महिलाओं को करीब 1 करोड़ रुपये का कमीशन दिया गया है।
  • सरकारी सप्लाई: इन केंद्रों में तैयार उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की सीधी आपूर्ति आयुष विभाग को की जा रही है।
  • रिकॉर्ड मुनाफा: राज्य के 4 प्रमुख केंद्रों ने बेहतरीन प्रबंधन से 25.17 लाख रुपये का शुद्ध लाभांश (Net Profit) कमाकर एक नई मिसाल पेश की है।

वनांचल की अर्थव्यवस्था को नई गति

वन धन विकास केंद्रों की यह अनूठी मुहिम न केवल महिलाओं को वित्तीय रूप से स्वतंत्र बना रही है, बल्कि स्थानीय वन संसाधनों के सही उपयोग से छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जंगलों की अर्थव्यवस्था को भी पुनर्जीवित कर रही है। यह सफल मॉडल देश में ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ के वनांचलों में जमीनी हकीकत में बदल रहा है।

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