सबसे दूर, सबसे पहले: छत्तीसगढ़ शासन का बड़ा कदम

रायपुर, 16 मई 2026: छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने के लिए राज्य शासन ने एक बड़ी पहल की है। आदिम जाति विकास विभाग द्वारा आगामी 18 से 25 मई 2026 तक प्रदेशव्यापी “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सुदूर वनांचल गांवों के पात्र हितग्राहियों तक सीधे बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है।

यह महा-अभियान केंद्र और राज्य सरकार की दो प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत आने वाले गांवों में केंद्रित रहेगा:

  • PM-JANMAN योजना: इसके तहत चिन्हित 1,544 गांवों को कवर किया जाएगा।
  • धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: इसके तहत 6,691 गांवों में गतिविधियां चलेंगी।

रायपुर जिला छोड़कर पूरे प्रदेश में फोकस

मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस अभियान का संचालन रायपुर जिले को छोड़कर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में एक साथ किया जाएगा। अभियान के दौरान जिला प्रशासन के आला अधिकारी खुद गांवों का दौरा करेंगे। वे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सीधे जन सुनवाई करेंगे। साथ ही, क्षेत्रीय “आदि सेवा केन्द्रों” के माध्यम से स्थानीय स्तर की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा।

स्वास्थ्य शिविर और डिजिटल मॉनिटरिंग

अभियान के दौरान लक्षित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन होगा, जिसमें मुख्य रूप से सिकल सेल एनीमिया और टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) की सघन जांच व इलाज किया जाएगा। इसके अतिरिक्त शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पोषण और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी योजनाओं का लाभ मौके पर ही पात्र लोगों को दिया जाएगा।

इस पूरे अभियान की पारदर्शिता के लिए कड़ी डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था की गई है। जमीनी स्तर पर हो रही प्रगति, शिविरों के फोटो, वीडियो और लाभान्वित हितग्राहियों के सीधे बयान प्रतिदिन विभाग के “आदि प्रसारण” वेब पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएंगे।

जन-भागीदारी और सांस्कृतिक समन्वय

शासन ने इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों (NGOs), एनएसएस (NSS), एनसीसी (NCC) और महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) की सक्रिय भागीदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। इस विशेष अभियान का समन्वय राज्य में चल रहे “सुशासन तिहार” और “जनजातीय गरिमा उत्सव” के साथ भी किया जाएगा, जिससे शासकीय कार्यों के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति और गौरव को भी बढ़ावा मिल सके।

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