सुकमा जिले के झापरा में सुशासन शिविर का आयोजन: मौके पर ही निपटे मामले, प्रमाण पत्रों का हुआ वितरण
सुकमा (छत्तीसगढ़) 18 मई । सुकमा जिले के झापरा में सुशासन शिविर का आयोजन: मौके पर ही निपटे मामले, प्रमाण पत्रों का हुआ वितरण
राज्य शासन के मंशानुरूप आम जनता को शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए जिले में ‘सुशासन तिहार’ का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत झापरा में एक विशाल सुशासन शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने पहुंचकर शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का लाभ उठाया।

ग्रामीणों से सीधा संवाद और त्वरित निराकरण
शिविर के दौरान जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सीधा संवाद किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांग और शिकायतों को गंभीरता से सुना। कई राजस्व और प्रशासनिक मामलों का अधिकारियों ने मौके पर ही निराकरण कर लोगों को राहत दी। इसके साथ ही ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की पात्रता, आवेदन करने की सही प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के संबंध में विस्तार से जानकारी देकर जागरूक किया गया।

प्रमाण पत्रों और किसान किताबों का वितरण
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित सुकमा तहसीलदार श्री गिरीश निम्बालकर, स्थानीय सरपंच श्रीमती मुन्नी मड़कामी और उपसरपंच श्री प्रवीण बारसे की उपस्थिति में पात्र हितग्राहियों को दस्तावेजों का वितरण किया गया। शिविर में कुल:
- 08 जाति प्रमाण पत्र
- 12 निवास प्रमाण पत्र
- 08 किसान किताब (ऋण पुस्तिका)
- 02 नामांतरण आदेश
इन आवश्यक दस्तावेजों के मौके पर मिलने से स्कूली विद्यार्थियों, ग्रामीणों और किसानों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
डिजिटल कृषि से जुड़े किसान: ‘एग्रीस्टैक’ पंजीयन
आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं से किसानों को जोड़ने के उद्देश्य से शिविर में विशेष काउंटर लगाया गया था। यहाँ 05 पात्र किसानों का एग्रीस्टैक (AgriStack) पंजीयन किया गया। इस पंजीयन के माध्यम से आने वाले समय में किसानों को डिजिटल कृषि सेवाएं, फसल मूल्यांकन और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और बेहद आसानी से मिल सकेगा।
समय और पैसे की बचत से ग्रामीणों में हर्ष
गांव में ही जिला प्रशासन को अपने बीच पाकर और एक ही छत के नीचे सभी काम होने पर ग्रामीणों ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। शिविर में आए हितग्राहियों ने कहा कि पहले इन कामों के लिए उन्हें जिला या तहसील मुख्यालय जाना पड़ता था। गांव में ही शिविर लगने से उनके समय और आने-जाने के खर्च दोनों की बड़ी बचत हुई है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सुशासन तिहार के तहत आयोजित किए जा रहे ये शिविर अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने और व्यवस्था को पारदर्शी व जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बेहद प्रभावी कदम साबित हो रहे हैं।
