शहडोल संभाग की वर्तमान स्थिति बुनियादी सुविधाओं की कमी, बदहाल बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक उदासीनता के कारण बेहद चिंताजनक बनी हुई है। संभाग मुख्यालय का दर्जा मिलने के बावजूद यह आदिवासी बहुल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर नजर आ रहा है। स्थानीय जनता बिजली-पानी के संकट, उखड़ी सड़कों, और बदहाल स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था से त्रस्त है।

बदहाली के आंसू रो रहा शहडोल
1. भीषण गर्मी में बिजली कटौती और पानी का हाहाकार
मई 2026 की इस भीषण गर्मी में शहडोल का पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। इस जानलेवा धूप और लू के बीच पूरा जिला गंभीर बिजली कटौती से जूझ रहा है। ग्रामीण अंचलों में के मुताबिक लोगों को केवल 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिससे रात की नींद और दिन का चैन दोनों छिन गया है। बिजली गुल होने के कारण पेयजल आपूर्ति ठप है, जिससे अस्पतालों में उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीजों की बाढ़ आ गई है।
2. सीवर लाइन के गड्ढे और उखड़ी सड़कें बनीं ‘काल’
पूरे शहडोल शहर की सड़कें पिछले तीन सालों से चल रहे सीवर लाइन के कछुआ गति काम के कारण गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। के अनुसार, ठेकेदार सड़कों को खोदकर बिना भरे ही छोड़ देते हैं, जिससे रोजाना भीषण सड़क हादसे हो रहे हैं। हाल ही में लापरवाही के कारण सीवर लाइन की मिट्टी धंसने से मजदूरों की जान भी जा चुकी है। ब्यौहारी क्षेत्र में हाल ही में हुए सड़क हादसों में कई लोगों की दर्दनाक मौतें हुई हैं।
3. स्वास्थ्य सेवाओं का वेंटिलेटर पर होना
करोड़ों की लागत से शहडोल में मेडिकल कॉलेज की भव्य इमारत तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन डॉक्टरों और आधुनिक उपकरणों का भारी टोटा है। के अनुसार, एंबुलेंस और डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता न होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीज दम तोड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक न होने के कारण मरीजों को जिला अस्पताल की लंबी कतारों में लगना पड़ता है या फिर जबलपुर और बिलासपुर के लिए रेफर होना पड़ता है।
4. शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल और युवाओं का पलायन
शहडोल संभाग में यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग कॉलेज और सीएम राइज स्कूल खोले तो गए हैं, लेकिन यहाँ ‘बिल्डिंगें हैं, शिक्षक नहीं’। हालत यह है कि एक ही शिक्षक को तीन से चार अलग-अलग विषयों को संभालना पड़ रहा है, और लैब व हॉस्टल जैसी सुविधाएं जर्जर हो चुकी हैं। इस लचर शिक्षा व्यवस्था के कारण क्षेत्र के गरीब और आदिवासी युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए कोटा, इंदौर और भोपाल जैसे शहरों की तरफ पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
5. बेलगाम खनन माफिया और प्रशासनिक भ्रष्टाचार
जिले की जीवनदायिनी नदियों से रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। खनिज विभाग के दफ्तरों के बाहर रेकी कर माफिया बेखौफ घूम रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, प्रशासनिक कार्यालयों में भ्रष्टाचार चरम पर है। हाल ही में लोकायुक्त पुलिस ने ब्यौहारी एसडीएम कार्यालय में है। इसके अलावा, एसईसीएल (SECL) खदानों के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों का मुआवजा और रोजगार न मिलने से स्थानीय किसान लंबे समय से कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे हैं और आंदोलन के लिए विवश हैं।
6. वन्यजीवों का आतंक और गौशालाओं की दुर्दशा
शहडोल के ग्रामीण इलाकों में जंगली हाथियों का आतंक बना हुआ है, जो फसलों को तबाह करने के साथ-साथ किसानों पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक उपेक्षा के चलते स्थानीय गौशालाओं में गायें भूख और प्यास से तड़प-तड़पकर मरने को मजबूर हैं, जिन पर सुध लेने वाला कोई नहीं है।
मुख्य समस्याओं का त्वरित अवलोकन
| समस्या का क्षेत्र | मुख्य कारण / वर्तमान स्थिति | जनता पर प्रभाव |
|---|---|---|
| बिजली व पानी | 45°C तापमान में अघोषित भारी कटौती, फाल्ट न सुधारना | डिहाइड्रेशन व बीमारियों में वृद्धि |
| सड़कें व बुनियादी ढांचा | 3 साल से लंबित सीवर लाइन प्रोजेक्ट, एप्रोच रोड रहित पुल | आए दिन घातक दुर्घटनाएं |
| स्वास्थ्य सेवाएं | मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों, एंबुलेंस व सीटी स्कैन की कमी | समय पर इलाज न मिलने से मौतें |
| शिक्षा | शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर माइनिंग कॉलेज व लैब | छात्रों का अन्य शहरों में भारी पलायन |
| प्रशासनिक स्तर | अवैध रेत खनन और सरकारी दफ्तरों में घूसखोरी | आम जनता और किसानों का शोषण |
निष्कर्ष
नेताओं के भाषणों और सरकारी कागजों में शहडोल भले ही ‘हाईटेक संभाग’ बनने की ओर अग्रसर दिख रहा हो, लेकिन धरातल पर यहां के नागरिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। यदि समय रहते इस आदिवासी अंचल की बुनियादी समस्याओं (बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा) पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया गया, तो शहडोल का यह पिछड़ापन आने वाले समय में और अधिक भयावह रूप अख्तियार कर लेगा।
