रायपुर, 21 मई 2026 कोपरा जलाशय बना छत्तीसगढ़ का गौरव: ‘स्थानीय कार्य, वैश्विक प्रभाव’ के साथ पर्यावरण संरक्षण का बना अनूठा मॉडल
छत्तीसगढ़ के पर्यावरण और जैव विविधता के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। राज्य का पहला रामसर स्थल घोषित होने के बाद ‘कोपरा जलाशय’ आज पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का एक वैश्विक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह जलाशय धरातल पर पूरी तरह साकार कर रहा है।

सुबह के शांत वातावरण में हजारों किलोमीटर दूर से आए प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट और जलाशय के आसपास अपनी आजीविका में जुटे ग्रामीणों की सक्रियता, प्रकृति और मानव जीवन के बीच के गहरे और अटूट संबंध को जीवंत करती है।
प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित स्वर्ग और समृद्ध जैव विविधता
कोपरा जलाशय न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बन चुका है। हर साल सर्दियों के मौसम में विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों से आने वाले दुर्लभ पक्षी यहाँ भोजन और विश्राम के लिए पहुँचते हैं।

पक्षियों के साथ-साथ यह जलाशय:
- जल-जीवों और मछलियों की विभिन्न प्रजातियों का घर है।
- दुर्लभ जलीय वनस्पतियों और सूक्ष्म जीवों को अनुकूल आवास देता है।
- अपनी इसी अद्वितीय महत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘रामसर साइट’ के रूप में नामांकित हुआ है।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा कवच
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, कोपरा जैसी आर्द्रभूमियां (वेटलैंड्स) धरती के लिए ‘प्राकृतिक सुरक्षा कवच’ और ‘स्पंज’ की तरह काम करती हैं। यह जलाशय क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवाएं दे रहा है:
- बाढ़ नियंत्रण और जल स्तर: वर्षा जल को रोककर बाढ़ के खतरे को टलता है।
- भूजल पुनर्भरण: आसपास के इलाकों का वाटर लेवल तेजी से सुधार रहा है।
- जल शुद्धिकरण: प्राकृतिक रूप से पानी को साफ कर कृषि के लिए उपयोगी बनाता है।
- कार्बन अवशोषण: भारी मात्रा में कार्बन सोखकर जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम कर रहा है।
शासन की नीतियां और समाज का संकल्प: मुख्यमंत्री
इस ऐतिहासिक उपलब्धि और संरक्षण कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा—
“कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। हमारी सरकार जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि के विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कोपरा जलाशय इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीतियां और समाज का संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारी समृद्ध प्रकृति ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है।
स्थानीय ग्रामीणों को मिला आजीविका का संबल
कोपरा जलाशय केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की भी रीढ़ है। वर्षों से यह क्षेत्र के लोगों के लिए जल, मत्स्य पालन और कृषि का मुख्य आधार बना हुआ है। रामसर स्थल घोषित होने के बाद यहाँ पर्यावरण-पर्यटन (Eco-Tourism) की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जिससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह इको-सिस्टम और मानव समाज के सह-अस्तित्व का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
