जंगल सफारी और बर्ड वॉचिंग का डबल डोज: देवपुर समर कैंप में बच्चों ने सीखी प्रकृति को बचाने की कला

रायपुर/बलौदा बाजार, 24 मई 2026देवपुर में समर नेचर कैंप संपन्न: नौतपा से पहले बच्चों ने सीखे पर्यावरण संरक्षण के गुर, बर्ड वॉचिंग और वाइल्डलाइफ सफारी का लिया आनंद

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में स्थित प्रसिद्ध बारनवापारा अभ्यारण्य के समीप देवपुर में बच्चों के लिए आयोजित विशेष ‘समर नेचर कैंप’ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। नौतपा की भीषण गर्मी की शुरुआत से ठीक पहले आयोजित इस शिविर में बच्चों ने न केवल रोमांचक गतिविधियों का लुत्फ उठाया, बल्कि प्रकृति के करीब रहकर पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सीख भी प्राप्त की। इस विशेष कैंप का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना और स्थानीय जैव विविधता से रूबरू कराना था।

दो राज्यों के 65 से अधिक बच्चों ने लिया हिस्सा

इस समर नेचर कैंप में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से आए 65 से अधिक प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। विशेष बात यह रही कि इस शिविर में वन विभाग के मैदानी स्टाफ के बच्चों को भी शामिल किया गया, जिससे वे अपने माता-पिता के कार्यक्षेत्र और वन्य जीवन को अधिक गहराई से समझ सकें।

सुबह जंगल ट्रेक और बर्ड वाचिंग से होती थी शुरुआत

शिविर के दौरान बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास को ध्यान में रखकर प्रतिदिन सुबह कई तरह की गतिविधियां आयोजित की गईं। बच्चों को हर सुबह जंगल ट्रेकिंग और बर्ड वाचिंग (पक्षी दर्शन) के लिए ले जाया जाता था। घने जंगलों के बीच से गुजरते हुए बच्चों ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जंगल की अनूठी संरचना को करीब से देखा। दूरबीन की मदद से बच्चों ने विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षियों को पहचानना सीखा।

टेंट कैंपिंग और एडवेंचर गेम्स से सीखी टीम भावना

बच्चों को आत्मनिर्भर और साहसी बनाने के लिए देवपुर में टेंट कैंपिंग की व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही आउटडोर एडवेंचर गेम्स और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आपसी टीम भावना (टीम वर्क), आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का विकास किया गया।

वाइल्डलाइफ सफारी और ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का भ्रमण

कैंप को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए बच्चों को बारनवापारा अभयारण्य में वाइल्डलाइफ सफारी कराई गई। सफारी के दौरान बच्चों ने खुले जंगल में वन्यजीवों की दुनिया को देखकर काफी रोमांच महसूस किया। इसके अलावा, अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से परिचित कराने के लिए बच्चों को ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। यहाँ बच्चों ने प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक अवशेषों के इतिहास को समझा।

पारंपरिक वैद्यों ने दी दुर्लभ जड़ी-बूटियों की जानकारी

शिविर के दौरान ‘विश्व जैव विविधता दिवस’ के विशेष अवसर पर बच्चों के लिए एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों को एक विशेष बायोडायवर्सिटी ट्रेल (जैव विविधता पथ) पर ले जाया गया। यहाँ स्थानीय पारंपरिक वैद्यों (जड़ी-बूटी विशेषज्ञों) ने वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की लाइव जानकारी दी। बच्चों ने सीखा कि कैसे ये पौधे सदियों से मानव स्वास्थ्य की रक्षा कर रहे हैं।

सामुदायिक सहभागिता की अनूठी पहल

शिविर के अंतिम चरणों में बच्चों को कम्युनिटी एंगेजमेंट (सामुदायिक सहभागिता) गतिविधियों से भी जोड़ा गया। इसके तहत बच्चों ने स्थानीय वनांचल समुदायों (आदिवासियों और ग्रामीणों) के साथ समय बिताया। बच्चों ने जाना कि कैसे स्थानीय लोग और वन समुदाय प्रकृति के साथ गहरे अंतर्संबंधों में रहते हैं और बिना नुकसान पहुंचाए जंगलों की रक्षा करते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के नेचर कैंप बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाने में बेहद मददगार साबित होते हैं। कैंप के समापन पर सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर प्रोत्साहित किया गया।

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