धान छूटा, मुनाफा दोगुना लूटा: ग्राफ्टेड बैंगन ने बदली किसान नवीन साव की किस्मत

महासमुंद/बसना 24 मई । ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से चमकी प्रगतिशील किसान नवीन साव की तकदीर, धान की तुलना में कमाया पांच गुना अधिक मुनाफा
कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर तालमेल से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका एक जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से पूरे अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

धान की खेती छोड़ अपनाया आधुनिक मार्ग

कृषक नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। इस सीमित आय से परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो रहा था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) का लाभ उठाया और ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की।

1.31 हेक्टेयर में वैज्ञानिक पद्धति का कमाल

नवीन साव ने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए खेती की शुरुआत की। उन्होंने पानी की बचत और पौधों के सटीक पोषण के लिए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और खरपतवार नियंत्रण व नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ।

क्या है ग्राफ्टेड तकनीक और इसके लाभ?

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी साबित हो रही है। इसमें दो अलग-अलग पौधों (अक्सर जंगली भटा और उन्नत किस्म) को जोड़कर एक नया सशक्त पौधा तैयार किया जाता है।

  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता: इससे पौधे की बीमारियों और कीटों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
  • अधिक उपज: इसमें पारंपरिक पौधों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक उपज मिलती है।
  • कम समय में तुड़ाई: यह फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।
  • लंबा जीवनकाल व उत्पादन: इसके एक ही पौधे से लगभग 50 किलोग्राम तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

ओडिशा की मंडियों तक फैला कारोबार, मिला पांच गुना मुनाफा

नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में बेचा। मंडियों में उनके उच्च गुणवत्ता वाले बैंगन को लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर प्राप्त हुई। बीज, खाद, मल्चिंग और मजदूरी के सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। यह मुनाफा धान से मिलने वाले लाभ की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नवीन साव की यह सफलता अन्य किसानों को भी नकदी फसलों और ग्राफ्टेड तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी, जिससे क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

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