रायपुर 29 मई । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए आपातकाल (इमरजेंसी) के दौर को भारतीय लोकतंत्र का काला धब्बा करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो कांग्रेस आज संविधान की रक्षा की बात करती है, उसी ने 1975 में संविधान को पूरी तरह ताक पर रखकर देश में इमरजेंसी लागू की थी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तानाशाही दिखाते हुए देश के तमाम गैर-कांग्रेसी नेताओं को सलाखों के पीछे डाल दिया था। राजनेताओं को 19-19 महीनों तक जेलों में बंद रखा गया, जिससे न केवल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था चरमराई, बल्कि उन नेताओं के परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। इस राजनीतिक विद्वेष के कारण देश के अनगिनत हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह बर्बाद हो गए। मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि इन तमाम हालातों और परिवारों की बर्बादी के लिए सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी दोषी है।
मीसा बंदियों के सम्मान पर कांग्रेस को घेरा
विष्णुदेव साय ने मीसा (MISA – Maintenance of Internal Security Act) बंदियों को लेकर कांग्रेस की राजनीति पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार उन लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) का पूरा सम्मान करती है, जिन्होंने देश में लोकतंत्र को बहाल करने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना लंबी जेल काटी। मुख्यमंत्री ने कहा, “आज जब हमारी सरकार ऐसे मीसा बंदियों का सम्मान कर रही है, तो कांग्रेस इस पर सवाल उठा रही है। सच्चाई यह है कि आपातकाल का पाप करने वाली कांग्रेस पार्टी को इस विषय पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है।”
लोकतंत्र सेनानियों के योगदान की सराहना
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश की भावी पीढ़ी को आपातकाल के काले दौर और उसके खिलाफ लड़ने वाले नायकों के बारे में जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार आपातकाल के दौरान प्रताड़ित हुए परिवारों के साथ खड़ी है और उनके त्याग व बलिदान का हमेशा सम्मान करती रहेगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य में आपातकाल और मीसा बंदियों के सम्मान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
