छत्तीसगढ़ शासन की ‘वन धन विकास केंद्र’ योजना से बदली वनांचल की तस्वीर: डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने कमाया ₹26.11 करोड़ का राजस्व
- कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग का ‘हरिबोल स्वयं सहायता समूह’ बना महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल।
- दिहाड़ी मजदूरी छोड़ हर्बल उद्यमी बनीं 12 आदिवासी महिलाएं, अब हर सदस्य की सालाना आय ₹1.7 लाख।
- आयुष विभाग से मिला ₹20 लाख का बड़ा ऑर्डर, वित्तीय वर्ष 2024-25 में कमाया ₹38.90 लाख का शुद्ध लाभ।
रायपुर/कोरबा, 30 मई 2026: छत्तीसगढ़ शासन की ‘वन धन विकास केंद्र’ योजना से बदली वनांचल की तस्वीर: डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने कमाया ₹26.11 करोड़ का राजस्व
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘वन धन विकास केंद्र’ (VDVK) योजना वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों में न केवल आर्थिक क्रांति ला रही है, बल्कि आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिख रही है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग के अंतर्गत ग्राम डोंगनाला में देखने को मिला है। यहाँ की 12 आदिवासी महिलाओं द्वारा गठित ‘हरिबोल स्वयं सहायता समूह’ ने शासन के सहयोग से एक सफल हर्बल उद्यम स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

दिहाड़ी मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर
कुछ समय पहले तक इस समूह की सदस्य आजीविका के लिए पूरी तरह से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण इन परिवारों के सामने जीवन-यापन की गंभीर चुनौती थी। लेकिन वन धन विकास केंद्र योजना ने इनके जीवन की दिशा बदल दी। स्थानीय स्तर पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की क्षमताओं को पहचानकर इन महिलाओं को एक सूत्र में पिरोया गया।
प्रशिक्षण और तकनीक से बने ‘हर्बल एक्सपर्ट’
महिलाओं के इस कौशल को व्यावसायिक रूप देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड और आयुर्वेद विशेषज्ञों ने आगे आकर जिम्मेदारी संभाली। समूह की महिलाओं को हर्बल प्रसंस्करण (Processing), गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control), आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और प्रभावी विपणन (Marketing) का कड़ा तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं ने पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक तकनीक अपनाई और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने शुरू किए। आज यह समूह मुख्य रूप से निम्नलिखित उत्पादों का निर्माण कर रहा है:
- त्रिफला चूर्ण और अश्वगंधा चूर्ण
- हर्बल फेस पैक
- हर्बल हेयर पाउडर
- आयुर्वेदिक टूथ पाउडर
आयुष विभाग का ऑर्डर और ₹26.11 करोड़ की संचयी बिक्री
अपनी शुद्धता और प्रभावशीलता के कारण इन हर्बल उत्पादों ने बहुत जल्द ही बाजार में धाक जमा ली। समूह की सफलता को तब बड़ा संबल मिला, जब शासन के आयुष विभाग ने इन्हें एक बड़ा ऑर्डर सौंपा, जिससे समूह को सीधे ₹20 लाख का शुद्ध लाभ हुआ। इसके बाद समूह की विश्वसनीयता और व्यावसायिक द्वार दोनों खुल गए।
आंकड़े गवाह हैं कि वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक की अवधि में वीडीवीके डोंगनाला ने कुल 26.11 करोड़ रुपए की संचयी बिक्री (Cumulative Sales) दर्ज कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। वहीं केवल वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही समूह ने 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया है।
जीवन स्तर में सुधार और बढ़ा आत्मविश्वास
इस योजना की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसका सीधा असर इन महिलाओं के चूल्हे-चौके और बच्चों के भविष्य पर पड़ा है। इस पहल से समूह की प्रत्येक महिला सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए हो गई है। आर्थिक स्वतंत्रता मिलने से इन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है। आज ये महिलाएं न केवल अपने घर के वित्तीय फैसले खुद ले रही हैं, बल्कि समाज में नेतृत्व क्षमता और बढ़े हुए आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान दर्ज करा रही हैं। डोंगनाला का यह मॉडल आज देश के अन्य वनांचलों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है।
