दुर्ग, 1 जून 2026
छत्तीसगढ़ शासन की ‘सुशासन’ नीति को धत्ता बताने और आम जनता के साथ अशोभनीय व्यवहार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। दुर्ग संभाग के आयुक्त (कमिश्नर) ने एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
सुशासन तिहार में सामने आया था दुर्व्यवहार का मामला
शासन द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए ग्राम थनोद में ‘सुशासन तिहार’ एवं जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस गरिमामयी शिविर के दौरान जनपद CEO रूपेश कुमार पाण्डेय द्वारा ग्रामीणों और आम जनता के साथ अत्यंत अशोभनीय व अभद्र व्यवहार किया गया। इस दुर्व्यवहार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और कलेक्टर दुर्ग के संज्ञान में आने के बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने कमिश्नर कार्यालय को निलंबन का प्रस्ताव भेजा था।
कारण बताओ नोटिस का जवाब पाया गया असंतोषजनक
आदेश के मुताबिक, वीडियो क्लिप के प्राथमिक अवलोकन से ही यह स्पष्ट हो गया था कि अधिकारी ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में भारी लापरवाही बरती है। इसके बाद कमिश्नर कार्यालय द्वारा 30 मई 2026 को सीईओ को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब मांगा गया था। श्री पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत किया गया स्पष्टीकरण अत्यंत असंतोषजनक और प्रशासनिक गरिमा के विपरीत पाया गया, जिसके बाद निलंबन की यह सख्त कार्रवाई की गई।
सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन
कमिश्नर कार्यालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारी का यह कृत्य ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ के नियम 3 के सर्वथा विपरीत है। इस नियम के तहत:
- प्रत्येक शासकीय सेवक को पूर्ण रूप से निष्ठावान रहना होगा।
- अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा सजग और समर्पित रहना होगा।
- ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना होगा जो एक शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय हो।
नियम 3-क के तहत शासकीय सेवकों द्वारा अपने पदीय कर्तव्यों के पालन में किसी भी प्रकार की अशिष्टता या अभद्रता करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि: प्रशासन का कड़ा संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से प्रशासनिक तंत्र ने एक बहुत ही सकारात्मक और कड़ा संदेश दिया है। आदेश की व्याख्या में साफ कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरा शासन तंत्र आम नागरिकों के प्रति उत्तरदायी है। इसलिए हर शासकीय सेवक द्वारा जनता के साथ शिष्ट, विनम्र और सहयोगी व्यवहार करना उनकी आचरण संहिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रशासन की इस त्वरित और न्यायपूर्ण कार्रवाई की आम जनता और जागरूक नागरिकों द्वारा सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि इस फैसले से शासकीय योजनाओं का लाभ लेने आने वाले सीधे-साधे ग्रामीणों का मनोबल बढ़ेगा और अधिकारी जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बनेंगे।
