रायपुर/गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, 1 जून 2026: विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के बच्चे तरणताल में सीख रहे तैराकी के गुर, मुख्यमंत्री साय की पहल से संवर रहा वनांचल का भविष्य
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों के चलते प्रदेश के दूरस्थ अंचलों के बच्चों की प्रतिभा निखरने लगी है। जंगलों और पहाड़ों के बीच जीवन व्यतीत करने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ समुदाय के बच्चे अब आधुनिक खेल सुविधाओं से जुड़ रहे हैं। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले में आयोजित जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर इन बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रहा है। यहाँ बैगा बालक-बालिकाएं नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के तरणताल (स्वीमिंग पूल) में तैराकी के आधुनिक खेल कौशल सीख रहे हैं।

सुदूर वनांचल के बच्चों को मिली प्राथमिकता
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष शिविर में आकांक्षी विकासखंड गौरेला के सुदूर वनांचल क्षेत्रों के बैगा बच्चों को प्राथमिकता दी गई है। प्राकृतिक जलस्रोतों, नदी-नालों के बीच पले-बढ़े इन बच्चों के लिए तरणताल का यह अनुभव बिल्कुल नया और रोमांचक है। आधुनिक तकनीक से तैराकी सीखने के साथ-साथ बच्चे खेल अनुशासन, समय प्रबंधन और प्रतिस्पर्धी खेल संस्कृति को भी आत्मसात कर रहे हैं। इससे उनके भीतर राष्ट्रीय स्तर पर चमकने का आत्मविश्वास जागृत हो रहा है।

समावेशी विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और कौशल विकास के अवसरों का विस्तार कर रही है। सरकार का मुख्य संकल्प है कि दूरस्थ अंचलों का कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे। बैगा समुदाय के बच्चों को मुख्यधारा की खेल गतिविधियों से जोड़ना सरकार की इसी समावेशी विकास नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस प्रयास से न केवल बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो रहा है, बल्कि वे बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

