बिलासपुर, 5 जून 2026:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान युवाओं को एक बड़ी सौगात दी। ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने मधुबन-जूना बिलासपुर क्षेत्र में बन रहे अत्याधुनिक ‘नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब’ का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया। इसके साथ ही अधिकारियों को हर हाल में काम की गुणवत्ता बनाए रखने और तय समय सीमा के भीतर प्रोजेक्ट को पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “यह महत्वाकांक्षी परियोजना प्रदेश के युवाओं के लिए सुनहरे अवसरों के नए द्वार खोलेगी। हमारा लक्ष्य बिलासपुर को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के एक बड़े राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है।”

13 एकड़ में फैलेगा शिक्षा का नया साम्राज्य
बिलासपुर को प्रदेश की न्यायधानी के साथ-साथ अब ‘शिक्षा की राजधानी’ के रूप में भी नई पहचान मिलने जा रही है। शहर में हर साल हजारों छात्र सीजीपीएससी (CGPSC), यूपीएससी (UPSC), नीट (NEET), जेईई (JEE), एसएससी (SSC), बैंकिंग और व्यापम जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। इन बाहरी छात्रों को रहने और पढ़ने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि पर 120 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस सर्वसुविधायुक्त एजुकेशन हब को तैयार कर रही है।

एक ही छत के नीचे मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
इस एजुकेशन हब को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी हर जरूरत के लिए परिसर से बाहर न जाना पड़े। इस कैंपस में मुख्य रूप से निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:
- नालंदा डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी: चौबीसों घंटे चालू रहने वाली हाई-टेक लाइब्रेरी, जहां लाखों ई-बुक्स और इंटरनेट की सुविधा होगी।
- हाई-टेक हॉस्टल: छात्रों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए 300-300 सीटर क्षमता वाले अलग-अलग बालक और बालिका छात्रावास।
- आधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक: स्मार्ट क्लासरूम और ग्रुप स्टडी के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए आधुनिक कमरे।
- सुरक्षित वातावरण: कैंपस के भीतर ही रहने, खाने और पढ़ने की सुरक्षित व्यवस्था।

पीपीपी मॉडल से आत्मनिर्भर बनेगा कैंपस, नगर निगम को होगी कमाई
परियोजना की सबसे खास बात इसका आर्थिक मॉडल है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस परिसर को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। कैंपस के भीतर 48 बड़े रेंटल हॉल (व्यावसायिक हॉल) बनाए जा रहे हैं। इन हॉल्स से मिलने वाले किराए से बिलासपुर नगर निगम के लिए दीर्घकालिक और स्थायी आमदनी का जरिया शुरू होगा। इस वजह से इस पूरे कैंपस का संचालन वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होगा और नगर निगम पर इसे चलाने के लिए कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
इस निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल बिलासपुर बल्कि छत्तीसगढ़ के दूर-दराज के जिलों से आने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को भी राष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
