🔥 लाल गलियारे में खुलेगी खुशहाली की राह! 7 जिलों के हर परिवार को मिलेगी नई आजीविका

रायपुर, 5 जून 20267 नक्सल प्रभावित जिलों के लिए एकीकृत आजीविका कार्यक्रम: प्रत्येक परिवार को जोड़ा जाएगा विविध आय स्रोतों से, मुख्य सचिव ने दिए कार्ययोजना के निर्देश
छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उनकी आय में भारी बढ़ोतरी करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘एकीकृत आजीविका कार्यक्रम’ को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य के 7 चयनित जिलों के प्रत्येक लक्षित परिवार को इस योजना का लाभ पहुंचाने के लिए एक व्यापक और व्यावहारिक कार्ययोजना (एक्शन प्लान) तुरंत तैयार की जाए।

यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिलों में लागू किया जाएगा। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा और सचिव श्री भीम सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

बहुआयामी आजीविका और नवाचार पर जोर

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को विविधिकृत (Diversified) आजीविका गतिविधियों से जोड़ना है। इसके तहत कृषि, वनोपज, पशुपालन और गैर-कृषि क्षेत्रों में नए नवाचार (Innovations) किए जाएंगे। ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग इकाइयां (प्रसंस्करण केंद्र) स्थापित की जाएंगी, कनेक्टिविटी सुधारी जाएगी और आवश्यक बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का तेजी से विकास किया जाएगा। इसके अलावा, ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सहकारी समितियों से भी जोड़ा जाएगा।

पशुपालन और संबद्ध क्षेत्रों से बढ़ेगी आमदनी

योजना के तहत पशुपालन सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत गांवों में:

  • कुक्कुट पालन (मुरगी पालन)
  • उन्नत बकरी पालन
  • डेयरी विकास
  • सूकर पालन (सुअर पालन)
  • मत्स्य पालन (मछली पालन)

इन सभी गतिविधियों के माध्यम से परिवारों के लिए नियमित और अतिरिक्त आय के स्रोत सुनिश्चित किए जाएंगे।

वनोपज और वृक्षारोपण बनेगा संबल

बस्तर और आसपास के जिलों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वनोपज संग्रहण और उसके प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम के तहत स्थानीय परिवारों को:

  • इमली, महुआ, और चिरोंजी संग्रहण
  • काजू और बांस उत्पादन
  • कोसा रेशम और लाख (Lac) की खेती
  • आधुनिक मधुमक्खी पालन

जैसे प्रमुख उत्पादों के वैज्ञानिक और व्यावसायिक प्रबंधन से जोड़ा जाएगा, जिससे वनांचल में रहने वाले परिवारों का जीवन स्तर पहले से कहीं बेहतर हो सके।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि सभी विभाग आपस में समन्वय (Coordination) बनाकर काम करें, ताकि मैदानी स्तर पर इस योजना का शत-प्रतिशत लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक समय पर पहुंच सके।

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