संवेदनशील नेतृत्व, सशक्त छत्तीसगढ़: सीएम विष्णु देव साय के स्वभाव से बदल रही राज्य की सूरत

विशेष संवाददाता, रायपुर

जनता के द्वार पहुंची सरकार: ग्राम सुराज की सफलता और मुख्यमंत्री साय के सरल स्वभाव ने जीता छत्तीसगढ़ का दिल
छत्तीसगढ़ की धरती पर इन दिनों विकास और विश्वास की एक नई बयार बह रही है। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ग्राम सुराज अभियान (सुशासन तिहार) ने सफलता के नए कीर्तिमान रचे हैं। इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत कोई बड़ी घोषणाएं नहीं, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का वह सहज और संस्कारी व्यक्तित्व है, जिसने सत्ता को सीधे जनता की चौपाल से जोड़ दिया है। एक आदिवासी किसान परिवार से निकलकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे श्री साय की सादगी और सज्जनता ने पूरे प्रदेश को प्रभावित किया है।

आम के पेड़ के नीचे लगी चौपाल, दूर हुईं समस्याएं

ग्राम सुराज अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने कागजी दावों से दूर जमीन पर उतरकर काम किया है। बस्तर के सुदूर नारायणपाल गांव से लेकर सरगुजा के वनांचलों तक, मुख्यमंत्री खुद ग्रामीणों के बीच पहुंचे। नारायणपाल में तो उन्होंने आम के पेड़ के नीचे बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया।

  • उन्होंने खुद पूछा कि राशन सही मिल रहा है या नहीं?
  • बिजली की क्या स्थिति है?
  • प्रधानमंत्री आवास और महतारी वंदन योजना का पैसा खातों में आ रहा है या नहीं?

इस सीधे और आत्मीय संवाद ने अधिकारियों को भी मुस्तैद रहने पर मजबूर कर दिया।

सज्जनता और संस्कारी स्वभाव की चौतरफा तारीफ

राजनीति में जहां अक्सर नेताओं के इर्द-गिर्द कड़ा पहरा और तामझाम दिखता है, वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इसके बिल्कुल उलट हैं। वे जब भी किसी गांव में जाते हैं, बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं, बच्चों को गोद में उठा लेते हैं और महिलाओं से भाई की तरह बात करते हैं। उनकी इस सज्जनता ने जनता के मन से मुख्यमंत्री पद का डर खत्म कर दिया है। लोग अब बिना किसी झिझक के अपनी बात उनके सामने रखते हैं। उनकी सहजता का ही असर है कि लोग उन्हें ‘अपना मुख्यमंत्री’ मानते हैं।

योजनाओं का जमीनी स्तर पर दिखा असर

ग्राम सुराज अभियान सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका बड़ा प्रशासनिक असर भी देखने को मिला:

  1. त्वरित समाधान: चौपालों में बिजली, पानी, सड़क और पेंशन से जुड़ी जो भी शिकायतें आईं, मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को उनके निपटारे के आदेश दिए。
  2. भ्रष्टाचार पर लगाम: मुख्यमंत्री के अचानक गांवों में पहुंचने से सरकारी दफ्तरों और जमीनी स्तर पर पारदर्शिता बढ़ी है।
  3. अंतिम व्यक्ति तक लाभ: महतारी वंदन योजना और किसान कल्याण की योजनाओं का सीधा लाभ अब छत्तीसगढ़ के सबसे पिछड़े इलाकों तक पहुंच रहा है।

बस्तर और सरगुजा में बदली तस्वीर

कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसने वाले बस्तर और सरगुजा के दूरदराज के इलाकों में इस अभियान से नई उम्मीद जगी है। बस्तर के अंदरूनी गांवों में डिजिटल नेटवर्क का विस्तार हो रहा है और सड़कें बन रही हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को उसका हक नहीं मिलेगा, तब तक सुराज की कल्पना अधूरी है।


छत्तीसगढ़ में ग्राम सुराज अभियान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व में ईमानदारी, सरलता और जनता के प्रति आदर का भाव हो, तो शासन को सुशासन बनने में देर नहीं लगती। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संस्कारी स्वभाव और काम करने के इस अनूठे ढंग ने छत्तीसगढ़ के विकास को एक नई और मानवीय दिशा दी है।

सुशासन का नया मॉडल: आंकड़ों में सफल रहा ‘ग्राम सुराज’, जिलों से आई बदलाव की कहानियां
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहा ग्राम सुराज अभियान (सुशासन तिहार) प्रशासनिक सुधार और जनता की संतुष्टि का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। सुदूर वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में इस अभियान को लेकर जो उत्साह देखा गया, वह यह बताने के लिए काफी है कि जनता और सरकार के बीच की दूरी अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री की सहजता ने इस सरकारी अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।

आंकड़ों की जुबानी: सुशासन की बड़ी सफलता

इस अभियान के तहत आए आवेदन और उनके निपटारे के आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने किस गति से काम किया है:

  • लाखों आवेदनों का निपटारा: सुशासन तिहार के पहले चरण में पूरे प्रदेश से लगभग 40 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमले ने दूसरे चरण में इन समस्याओं का रिकॉर्ड गति से निपटारा किया।
  • आवास और खुशहाली: छत्तीसगढ़ के लाखों परिवारों को ⁠प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान की सौगात दी गई है, जिसमें सौर ऊर्जा जैसी आधुनिक सुविधाएं भी शामिल हैं।
  • धान किसानों को बड़ी राहत: सरकार ने कृषक उन्नति योजना के तहत धान किसानों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बड़ा पैकेज मंजूर किया है, जिससे सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
  • भूमिहीन परिवारों को संबल: दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत राज्य के करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है।

कोंडागांव में जब सीएम ने कराया गृह प्रवेश

ग्राम सुराज अभियान की सबसे सुंदर और भावुक कर देने वाली तस्वीर कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा से सामने आई। यहां सुशासन तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अचानक एक गरीब ग्रामीण चमन लाल के घर पहुंचे। चमन लाल का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया पक्का मकान बना था।

मुख्यमंत्री ने वहां किसी बड़े नेता की तरह नहीं, बल्कि परिवार के एक बड़े सदस्य की तरह चमन लाल और उनके परिवार के साथ मिलकर सपरिवार गृह प्रवेश कराया। सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमगाते उस घर में मुख्यमंत्री ने खुद बैठकर परिवार की खुशियों को साझा किया। चमन लाल ने भावुक होकर कहा, “हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राज्य का मुख्यमंत्री हमारे गरीब के घर आकर गृह प्रवेश कराएगा। साय साहब बहुत सरल हैं।”

बस्तर में बदला जीवन: नारायणपाल की ‘सरिता’ और ‘ललिता’

बस्तर जिले के नारायणपाल गांव में देवगुड़ी परिसर में आम के पेड़ के नीचे लगी मुख्यमंत्री की चौपाल ने इतिहास रच दिया। वहां मुख्यमंत्री ने किसी कागजी फाइल को देखने के बजाय सीधे लोगों से बात की:

  • गांव की सरिता कश्यप ने मुख्यमंत्री को बताया कि कैसे ‘महतारी वंदन योजना’ से मिलने वाले पैसे का उपयोग वह अपने बच्चों के इलाज और घरेलू खर्चों में कर रही हैं।
  • बेल मेटल (कांसा शिल्प) का काम करने वाली ललिता बघेल ने बताया कि पहले उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए गहने गिरवी रखने पड़ते थे, लेकिन सरकार की मदद से अब वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
    मुख्यमंत्री ने वहीं अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतिम छोर पर बैठे हर व्यक्ति तक सरकारी मदद बिना किसी देरी के पहुंचनी चाहिए।

सुशासन के नए स्तंभ: नियद नेल्लानार और बाल विवाह मुक्ति

इस अभियान के साथ-साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में कुछ और बड़े सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव किए हैं:

  1. ‘नियद नेल्लानार’ योजना (आपका अच्छा गांव): बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित हो रही है। इसके तहत 17 विभागों की 53 योजनाओं का लाभ सीधे वनांचल के लोगों को मिल रहा है।
  2. बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री ने एक बड़ा सामाजिक संकल्प लेते हुए वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतें पहले ही पूरी तरह बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं।
  3. मोर गांव, मोर पानी अभियान: जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने जशपुर की धरती से इस नए अभियान की शुरुआत की है, जिससे गांवों के तालाबों और जलस्रोतों को नया जीवन मिल रहा है।

  1. छत्तीसगढ़ का यह ग्राम सुराज और सुशासन तिहार केवल फाइलों को बंद करने का अभियान नहीं है, बल्कि यह जनता के चेहरों पर मुस्कान लाने का जरिया बना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सहज, संस्कारी और संवेदनशील स्वभाव ही इस पूरी व्यवस्था की असली ताकत है, जो छत्तीसगढ़ को देश के नक्शे पर एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

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