विशेष संवाददाता रायपुर 18 जून।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षा और संस्कारों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में मंत्रोच्चारण होने से बच्चों के भीतर आध्यात्मिक शक्ति जागेगी। इसके साथ ही बच्चों में देश के प्रति प्रेम की भावना भी मजबूत होगी, जिससे वे आगे चलकर देश के सच्चे राष्ट्रभक्त नागरिक बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह बात बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास के संदर्भ में कही। उनका मानना है कि आज के आधुनिक युग में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ना बहुत जरूरी है।
संस्कार और शिक्षा साथ-साथ
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्कूल केवल किताबी ज्ञान देने का केंद्र नहीं हैं। वे बच्चों के भविष्य और उनके चरित्र का निर्माण करते हैं। स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के समय या विशेष अवसरों पर मंत्रों का उच्चारण करने से स्कूल का माहौल पवित्र होता है। इससे बच्चों की एकाग्रता (फोकस) बढ़ती है और उनका दिमाग शांत रहता है। जब बच्चे अपनी संस्कृति के श्लोक और मंत्र सुनेंगे और बोलेंगे, तो उनके मन में अच्छे विचार आएंगे।
जागेगी राष्ट्रप्रेम की भावना
मुख्यमंत्री का मानना है कि जो बच्चा अपनी संस्कृति और जड़ों का सम्मान करना सीखता है, वह अपने देश से भी सच्चा प्रेम करता है। मंत्रोच्चारण और नैतिक शिक्षा से बच्चों में समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा होगी। वे अनुशासन सीखेंगे और बड़ों का आदर करेंगे। यही भावना उन्हें आगे चलकर एक अच्छा और सच्चा देशभक्त बनाएगी, जो देश की उन्नति में अपना योगदान देगा।
चौतरफा विकास पर सरकार का ध्यान
छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का चौतरफा विकास हो। शिक्षा विभाग अब इस दिशा में काम कर रहा है ताकि पढ़ाई के साथ-साथ खेल, योग और नैतिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा सके। मुख्यमंत्री के इस विचार के बाद आने वाले दिनों में प्रदेश के स्कूलों में प्रार्थना सभाओं के दौरान सकारात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल सकती है।
