छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बच्चों को मिलेगा गरमा-गरम भोजन, मुख्य सचिव ने दिए कड़े निर्देश

रायपुर, 18 जून 2026

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक अच्छी खबर है। अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों को रोज गरमा-गरम और साफ-सुथरा भोजन मिलेगा। इसके लिए सरकार ने तैयारी पूरी कर ली है।

गुरुवार को रायपुर के महानदी भवन में एक बड़ी बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने की। यह बैठक ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ को लेकर बुलाई गई थी। बैठक में नए पढ़ाई के साल (शैक्षणिक सत्र 2026-27) के लिए कई बड़े फैसले लिए गए।

🍲 हर बच्चे को मिलेगा अच्छा खाना

मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को कड़े आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहली क्लास से लेकर आठवीं क्लास तक के सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से गरम भोजन और पौष्टिक चीजें दी जाएं। स्कूलों में खाना पकाने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके बदले हर स्कूल में रसोई गैस (LPG सिलेंडर) की पक्की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारी खुद जमीन पर जाकर जांच करेंगे कि बच्चों को सही खाना मिल रहा है या नहीं।

🏬 शहरों में बनेगी ‘सेंट्रल किचन’

शहरी इलाकों के स्कूलों में भोजन की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए सरकार एक नई व्यवस्था करने जा रही है। शहरों और उनके आस-पास के स्कूलों के लिए ‘सेंट्रल किचन’ (एक बड़ी रसोई) बनाई जाएगी। इस बड़ी रसोई में एक साथ बहुत सारा खाना पकेगा। यहाँ से खाना सीधे स्कूलों में भेजा जाएगा। इससे खाने की शुद्धता, सफाई और स्वाद बहुत बढ़िया रहेगा।

👩‍🌾 महिलाओं की बढ़ेगी आमदनी

इस योजना से गांवों की महिलाओं को भी फायदा होगा। मुख्य सचिव ने कृषि विभाग को एक खास काम सौंपा है। उन्होंने कहा कि खाना बनाने वाले महिला स्व-सहायता समूहों (Self-Help Groups) को सब्जी और मसालों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे दो बड़े फायदे होंगे:

  • स्कूलों में बच्चों को खाने के लिए बिल्कुल ताजी और हरी सब्जियां मिलेंगी।
  • गांवों में रहने वाली इन महिलाओं की कमाई भी बढ़ जाएगी।

📊 योजना से जुड़े कुछ बड़े आंकड़े

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि यह योजना पूरे राज्य में बहुत बड़े पैमाने पर चल रही है:

  • 56 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में यह योजना लागू है।
  • 29 लाख से ज्यादा स्कूली बच्चों को हर दिन गरम और पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है।
  • 86 हजार से अधिक रसोइया (खाना पकाने वाले) इस काम से जुड़कर रोजगार पा रहे हैं। [1]

इस बैठक में राज्य के कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि बच्चों की सेहत अच्छी रहे और उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ सही पोषण भी मिले।

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