रायपुर, 20 जून 2026।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने लोक भवन में सौजन्य मुलाकात की। इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने सभी युवा अधिकारियों को उनकी नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल ने अधिकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे बड़ी चुनौती
प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर संकट बनकर खड़ा है। वन अधिकारियों के पास इस संकट से लड़ने के लिए कानून, संसाधन और अधिकार तीनों मौजूद हैं। इन अधिकारों का सही और कड़ा उपयोग करके वे पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। साथ ही मौसम के बदलते मिजाज और उसके बुरे प्रभावों को कम करने में अपना बड़ा योगदान दे सकते हैं।
प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा हैं प्राकृतिक आपदाएं
राज्यपाल ने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि आज इंसान अपनी जरूरतों के लिए प्रकृति के साथ बहुत ज्यादा छेड़छाड़ कर रहा है। इसी का नतीजा है कि दुनिया में भूकंप, बाढ़ और सूखे जैसी भयानक प्राकृतिक आपदाएं तेजी से बढ़ रही हैं। आज के समय की सबसे बड़ी मांग यही है कि हम पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने न दें। मनुष्य, पशु और प्रकृति के बीच सही तालमेल बिठाना ही देश और राज्य के विकास का असली आधार है।
नदियों को बचाने और रेत के विकल्प पर शोध की जरूरत
विकास कार्यों में रेत की जरूरत पर बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भवन और सड़कें बनाने के लिए रेत एक बहुत जरूरी खनिज है। लेकिन इसके अंधाधुंध खनन से नदियों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने युवा अधिकारियों से इस क्षेत्र में नए शोध और प्रयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी तकनीक और उपाय खोजने होंगे, जिससे नदियों में पानी का बहाव हमेशा बना रहे, नदियों की क्षमता बढ़े, पर्यावरण को कोई नुकसान न हो और निर्माण कार्यों के लिए जरूरी रेत भी मिलती रहे। उन्होंने अधिकारियों को जंगलों से दिल लगाने की सलाह दी, ताकि वे अपने काम को और बेहतर तरीके से समझ सकें।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को सफल बनाने की अपील
राज्यपाल ने राज्य में हरियाली बढ़ाने के लिए पेड़ लगाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को पूरे राज्य में पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शहरों में पेड़ों के आसपास कंक्रीट बिछाने की आदत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेड़ों के चारों तरफ कंक्रीट का घेरा बना देने से पेड़ों की बढ़त रुक जाती है और बारिश का पानी भी जमीन के अंदर नहीं जा पाता। वन विभाग के अधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए।
इस मुलाकात के दौरान राजभवन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
