विशेष संवाददाता, रायपुर
25 जून 2026
छत्तीसगढ़ में कर चोरी और फर्जी बिलिंग (कागजी कारोबार) करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) ने एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक की है। विभाग के उड़नदस्ते ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राजनांदगांव की फर्म ‘मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक’ के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी व्यापारी पर केवल कागजों में 76 करोड़ रुपये का हेरफेर करने और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने का संगीन आरोप है।

केवल कागजों पर चला 76 करोड़ का ‘लोहा’, माल का अता-पता नहीं
विभागीय जांच से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आदेश्वर ट्रेड लिंक ने पिछले महज छह महीनों के भीतर करीब 76 करोड़ रुपये का बोगस टर्नओवर (लेन-देन) खड़ा कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा कारोबार सिर्फ फाइलों और कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित था। जमीन पर न तो कोई माल खरीदा गया और न ही बेचा गया। उपलब्ध दस्तावेजों, जीएसटी रिटर्न (GST Return) और डिजिटल फुटप्रिंट्स के विश्लेषण से साफ हुआ है कि इस कागजी खेल के जरिए 8.22 करोड़ रुपये की संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का नाजायज फायदा उठाया गया।
पश्चिम बंगाल की बोगस फर्मों से जुड़े तार
जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इस फर्जीवाड़े की जड़ें छत्तीसगढ़ के बाहर तक फैली हुई हैं। गिरफ्तार आरोपी आदेश्वर चौरड़िया ने पश्चिम बंगाल की कई संदिग्ध और फर्जी कंपनियों से आयरन एवं स्टील (लोहा और इस्पात) की फर्जी खरीदी दिखाई थी। बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के, करोड़ों रुपये के फर्जी इनवॉइस (बिल) हासिल किए गए। इसके बाद शातिराना तरीके से इस बोगस आईटीसी (Fake ITC) का लाभ खुद भी लिया गया और आगे कड़ियों की तरह अन्य करदाताओं (टैक्सपेयर्स) को भी ट्रांसफर कर दिया गया।
रेड में खुली पोल: सप्लायर कंपनियों के रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द
जब स्टेट जीएसटी की विशेष टीम ने इन सप्लायर फर्मों की कुंडली खंगाली, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। माल सप्लाई करने का दावा करने वाली अधिकांश कंपनियों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन विभाग द्वारा पहले ही निरस्त (Cancel) किए जा चुके थे। इन फर्मों के ठिकानों पर वास्तविक व्यापार होने का कोई भी नामोनिशान या साक्ष्य नहीं मिला। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा गिरोह ‘पेपर ट्रेडिंग’ (कागजी बिलिंग) और बोगस आईटीसी नेटवर्क के दम पर ही फल-फूल रहा था।
ई-वे बिल और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच शुरू
पर्याप्त पुख्ता सबूत और दस्तावेजों की जब्ती के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को सलाखों के पीछे भेज दिया है। हालांकि, विभाग का मानना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। इस रैकेट के पीछे कई और सफेदपोश चेहरे और बड़ी फर्में शामिल हो सकती हैं। नेटवर्क की गहराई को नापने के लिए अब विभाग कड़े कदम उठा रहा है:
- संदिग्धों के बैंक खातों (Bank Accounts) के ट्रांजैक्शन खंगाले जा रहे हैं।
- परिवहन के दावों की पोल खोलने के लिए ई-वे बिल (E-Way Bills) और गाड़ी नंबरों की जांच की जा रही है।
- ट्रांसपोर्टर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
जीएसटी विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से प्रदेश के फर्जी बिलिंग करने वाले गिरोहों और बोगस कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि टैक्स चोरी के खिलाफ यह जीरो-टॉलरेंस अभियान आगे भी जारी रहेगा।
