रायपुर रेलवे स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब, 1040 विशिष्टजनों का हुआ भव्य एवं आत्मीय स्वागत
रायपुर, 27 जून 2026। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी और देश की सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित ’’सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’’ आज ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हो गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू हुआ संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय एकात्मता का यह अनूठा अभियान आज उस समय पूर्ण हुआ जब प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन कर लौटे प्रदेश के 1040 विशिष्टजनों का रायपुर रेलवे स्टेशन पर ढोल-नगाड़ों, पुष्पवर्षा और तिलक लगाकर आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया गया। पांच दिवसीय इस पावन यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, अटूट श्रद्धा और आत्मिक आनंद की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

मुख्यमंत्री साय की दूरदर्शिता: आस्था और राष्ट्रीय एकात्मता का संगम
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर शुरू की गई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रदेशवासियों में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देना है। राज्य सरकार ने इस यात्रा के माध्यम से छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के प्रबुद्ध और विशिष्ट नागरिकों को देश के सबसे प्राचीन और गौरवशाली सांस्कृतिक प्रतीक सोमनाथ मंदिर के दर्शन कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यात्रियों ने इस सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का सहृदय आभार व्यक्त किया और इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास में सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक स्वर्णिम अध्याय बताया।
रेलवे स्टेशन पर दिखा उत्सव जैसा माहौल
आज जैसे ही यात्रियों को लेकर विशेष ट्रेन रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंची, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय सोमनाथ’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं के परिजनों ने यात्रियों का भावभीना स्वागत किया। स्टेशन पर सुरक्षा, चिकित्सा और सुगम आवागमन के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे यात्रियों को घर वापसी में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सभी 33 जिलों के विशिष्टजन हुए शामिल
इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सर्वसमावेशी संरचना थी। प्रदेश के सभी जिलों से समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले 1040 विशिष्टजनों को इसमें शामिल किया गया था। यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच एक अद्भुत सांस्कृतिक सेतु देखने को मिला। सह-यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के भीतर और बाहर व्यवस्थाएं बेहद उत्कृष्ट थीं। खान-पान से लेकर रहने और सुरक्षा के ऐसे इंतजाम थे कि किसी को भी घर से दूर होने का अहसास नहीं हुआ।
यात्रियों के अनुभव: “जीवन भर याद रहेगा यह दिव्य क्षण”
दर्शन कर लौटे विशिष्टजनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समुद्र तट पर स्थित भव्य सोमनाथ मंदिर की दिव्य छटा और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया। यात्रियों ने छत्तीसगढ़ की खुशहाली, तरक्की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए भगवान सोमनाथ से विशेष प्रार्थना की। कई बुजुर्ग यात्रियों की आंखें खुशी से नम थीं, उनका कहना था कि सरकार के इस प्रयास की बदौलत ही उनका प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन का जीवनभर का सपना साकार हो पाया है।
इस सफल यात्रा ने न केवल छत्तीसगढ़ की जनता को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ा है, बल्कि पूरे देश में राष्ट्रीय एकात्मता का एक सशक्त संदेश भी प्रसारित किया है।
- बुजुर्ग महिला यात्री (रायपुर जिला):
“मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जीवन के इस पड़ाव पर भगवान सोमनाथ के दर्शन इतनी सुगमता से हो पाएंगे। ट्रेन में घर जैसा माहौल था और हर कदम पर हमारा ख्याल रखा गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हमें बेटा बनकर तीर्थ कराया है, उन्हें मेरा कोटि-कोटि आशीर्वाद।”
- युवा विशिष्टजन (बस्तर संभाग):
“यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकात्मता का अद्भुत अनुभव थी। देश के गौरवशाली इतिहास और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को एक साथ महसूस करना गर्व की बात है। सोमनाथ मंदिर की भव्यता और समुद्र की लहरों के बीच वह दिव्य आरती जीवन भर याद रहेगी।”
- वरिष्ठ समाजभोगी (बिलासपुर):
“शासन की व्यवस्थाएं इतनी उत्कृष्ट थीं कि 1040 यात्रियों के इस विशाल दल में किसी को भी कोई परेशानी नहीं हुई। भोजन, ठहरने से लेकर सुरक्षा तक के पुख्ता इंतजाम थे। इस यात्रा ने पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के लोगों को एक परिवार के रूप में जोड़ दिया है।”
- महिला उद्यमी/प्रतिनिधि (सरगुजा):
“प्रथम ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह के सामने खड़े होकर जो आत्मिक शांति मिली, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। हमने भगवान सोमनाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और हमारे प्रदेश को देश का नंबर एक राज्य बनाने की प्रार्थना की है।”
