धमतरी में कृषि क्रांति: महज 50 दिनों में चमकी किसान की किस्मत, मचान विधि से खीरे की रिकॉर्ड पैदावार

धमतरी/रायपुर, 30 जून 2026। मचान विधि से खीरे की खेती ने बदली विशेष पिछड़ी जनजाति के किसान की किस्मत, 4 एकड़ में किया कमाल

सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे बंपर मुनाफे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक श्री खीमांशु गजेसिंग आज आधुनिक कृषि की बदौलत पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत (रोल मॉडल) बन गए हैं।

पारंपरिक ढर्रे को छोड़ अपनाया वैज्ञानिक तरीका

कृषक खीमांशु गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे पारंपरिक ढर्रे पर खेती करते थे, जिससे लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। इस साल उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क में रहकर तकनीकी मार्गदर्शन लिया। उन्होंने अपनी 4 एकड़ भूमि पर खीरे की व्यावसायिक खेती करने का फैसला किया। उन्होंने उन्नत बीज, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और वैज्ञानिक पौध संरक्षण पद्धतियों को अपनाया।

मचान विधि: कम समय में शानदार उपज और बेहतरीन दाम

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो महज 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। श्री गजेसिंग ने पारंपरिक तरीके से खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय ‘मचान और तारों’ का सहारा देकर ऊपर चढ़ाया। [1, 2]

इस आधुनिक मचान विधि के कई बड़े फायदे देखने को मिले:

  • गुणवत्ता में सुधार: फल जमीन के सीधे संपर्क में नहीं आए, जिससे वे गलने और सड़ने से बच गए। [1, 2]
  • आकर्षक लुक: फलों का आकार, प्राकृतिक रंग और चमक शानदार रही।
  • बाजार में ऊंची मांग: चमक और अच्छी क्वालिटी के कारण स्थानीय और आसपास के बाजारों में इस खीरे की भारी मांग है, जिससे किसानों को बेहतरीन भाव मिल रहा है।
  • रिकॉर्ड उत्पादन: मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है। श्री गजेसिंग को अपनी 4 एकड़ की फसल से भारी मुनाफा हुआ है, जिसने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।

सरकारी योजनाओं और मार्गदर्शन से पलटा पासा

अपनी इस शानदार सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्री खीमांशु गजेसिंग ने बताया, “विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग ने मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका दिया। आधुनिक तकनीकों ने पासा पलट दिया है।” इस सफलता से उत्साहित होकर खीमांशु अब भविष्य में अन्य उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए अपने उत्पादन को और ज्यादा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

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