विशेष संवाददाता, रायपुर 1 जुलाई ।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नहीं होगी शिक्षकों की कमी, शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति को हरी झंडी
बड़ा फैसला: सहायक शिक्षक से लेकर प्राचार्य तक को मिलेगा लाभ; पढ़ाई व्यवस्था रहेगी निर्बाध, शासन ने जारी की प्रशासकीय स्वीकृति
छत्तीसगढ़ के शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य शासन ने स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त और निरंतर बनाए रखने के लिए एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने कार्यरत शिक्षक संवर्ग को वर्तमान शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) प्रदान करने की अपनी अंतिम प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है।

मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर अटल नगर) से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। शासन के इस कदम से राज्य के हजारों अनुभवी शिक्षकों को सेवा विस्तार मिलेगा, वहीं बोर्ड परीक्षाओं सहित सामान्य कक्षाओं की पढ़ाई भी बिना किसी बाधा के पूरी हो सकेगी।
संचालक को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश
जारी आदेश के अनुसार, यह फैसला लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर व्यापक विचार-विमर्श और शासन के उच्च स्तरीय अनुमोदन के बाद लिया गया है। सरकार ने लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पुनर्नियुक्ति के लिए तय दिशा-निर्देशों और पात्रता मापदंडों के अनुरूप पात्र शिक्षकों की सूची तैयार कर अपने स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी स्कूल में शिक्षकों के पद खाली न रहें।
इन पदों पर मिलेगा पुनर्नियुक्ति का लाभ
शासन द्वारा जारी यह आदेश व्यापक है और इसके दायरे में प्राथमिक शालाओं से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तक का पूरा प्रशासनिक व शैक्षणिक ढांचा आएगा:
- सहायक शिक्षक (Primary School)
- शिक्षक (Middle School)
- व्याख्याता (High/Higher Secondary School)
- प्रधान पाठक (Middle & Primary School)
- प्राचार्य (Principals)
विद्यार्थियों के हित में लिया गया नीतिगत निर्णय
शिक्षा सत्र के बीच में शिक्षकों के सेवानिवृत्त (Retire) होने से सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को होता है। शासन के इस नीतिगत निर्णय का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पठन-पाठन की निरंतरता (Continuity) बनाए रखना है। इस व्यवस्था से न केवल स्कूलों का अनुशासन बना रहेगा, बल्कि नए सत्र के अंत तक विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम भी समय पर और निर्बाध रूप से पूरा हो सकेगा।
