विशेष संवाददाता, रायपुर/रायगढ़ (3 जुलाई 2026):
* शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण सड़कों का बदलेगा स्वरूप; धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों को सीधा लाभ
* जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) से स्वीकृत हुए 13 महत्वपूर्ण कार्य, 365 दिनों में काम पूरा करने की समय-सीमा तय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खनन प्रभावित क्षेत्रों के कायाकल्प में पूरी ताकत से जुट गई है। इसी कड़ी में रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित इलाकों में विकास की रफ्तार को तेज करते हुए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस भारी-भरकम राशि से जिले के चार प्रमुख विकासखंडों—धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना (Infrastructure) और ग्रामीण कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती मिलेगी। सरकार के इस कदम से न केवल बुनियादी ढांचा सुधरेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी जबरदस्त गति मिलने की उम्मीद है।
1. ग्रामीण युवाओं के सपने होंगे साकार: ₹6.39 करोड़ से बनेंगे हाइटेक पुस्तकालय
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा और धरमजयगढ़ विकासखंडों में आधुनिक अध्ययन संसाधनों से लैस पुस्तकालय (लाइब्रेरी) भवनों के निर्माण और अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे गांवों के युवाओं को भी शहरों की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण और शांत अध्ययन का माहौल मिल सकेगा।
2. आईटीआई का कायाकल्प: बढ़ेगा रोजगार और कौशल विकास
स्थानीय युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को अपग्रेड किया जा रहा है। इसके तहत:
- शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं।
- शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे युवाओं को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
3. किसानों की बढ़ेगी ताकत: मजबूत होगी कृषि अधोसंरचना
तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए विशेष बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके तहत:
- ₹1 करोड़ 21 लाख 81 हजार की लागत से एक भव्य व्यावसायिक परिसर का निर्माण होगा।
- ₹1 करोड़ 5 लाख 20 हजार की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से स्थानीय किसानों को अपने उत्पादों के भंडारण, विपणन (Marketing) और व्यापार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
4. सुगम होगा आवागमन: ₹24.73 करोड़ से चमकेगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क
क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए सबसे बड़ा निवेश सड़क नेटवर्क पर किया जा रहा है। चारों विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से 8 महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
इन 8 प्रमुख मार्गों का होगा निर्माण:
- पीपराही-डीपापारा मार्ग
- सुबरा-कटकलिया मार्ग
- कोंडकेल-गेरूपानी मार्ग
- ढाप-भवानीपुर मार्ग
- किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर मार्ग
- बरमुड़ा-उकारीपाली मार्ग
- टेरम-छिरभौंना मार्ग
- बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग
इन सड़कों के बनने से ग्रामीणों का आवागमन आसान होगा, कृषि उपजों को मंडियों तक ले जाने में सुविधा होगी और आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बेहद सुलभ हो जाएगी।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: 1 साल के भीतर काम पूरा करने का अल्टीमेटम
इन सभी स्वीकृत कार्यों को तय समय-सीमा और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है।
जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी 13 निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों (एक वर्ष) के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिए जाएं। सरकार की इस मंशा को जमीन पर उतारने के लिए कार्यों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग और औचक गुणवत्ता परीक्षण (Quality Testing) भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जनता की गाढ़ी कमाई का पाई-पाई का सही उपयोग हो सके।
