रायपुर/मुंगेली, 04 जुलाई।
बदलेगा ग्रामीण भारत: विकसित भारत रोजगार मिशन से गांवों में ‘आर्थिक क्रांति’, अब 125 दिन रोजगार की गारंटी!
पलायन पर लगेगा ‘फुल स्टॉप’: बढ़ी मजदूरी और अतिरिक्त दिनों से ग्रामीणों के चेहरे खिले, मुंगेली की गोमती बोलीं- ‘सरकार ने दिया सम्मानजनक जीवन का अधिकार’

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा विजन से शुरू हुए ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन’ ने गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलना शुरू कर दिया है। योजना के तहत रोजगार की अवधि को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने और मजदूरी दरों में बंपर वृद्धि के फैसले से ग्रामीण अंचलों में उत्सव जैसा माहौल है। जानकार इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने वाला अब तक का सबसे बड़ा और असरदार कदम मान रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पहले आखिरी महीनों में थमती थी सांसें, अब सालभर काम की गारंटी’
मुंगेली जिले के ग्राम लिम्हा की सजग ग्रामीण श्रीमती गोमती साहू ने इस मिशन को सीधे तौर पर ग्रामीण परिवारों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ बताया है। गोमती ने भावुक होते हुए कहा:
”पहले साल में सिर्फ 100 दिनों का ही रोजगार मिलता था। काम खत्म होते ही परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता था और बच्चों की फीस से लेकर राशन तक के लिए कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन अब 125 दिनों के अकुशल श्रम की गारंटी ने हमारी सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी है। बढ़ी हुई आय से अब हम सम्मान के साथ अपने घर का खर्च चला सकेंगे।”
रोजगार के लिए नहीं छोड़ना पड़ेगा घर, बच्चों की पढ़ाई होगी बेहतर
इस ऐतिहासिक निर्णय का सबसे बड़ा असर ग्रामीण पलायन पर पड़ने वाला है। गोमती साहू के मुताबिक, गांव में ही अधिक दिनों तक और बढ़ी हुई दरों पर काम मिलने से अब युवाओं और मजदूरों को आजीविका के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल परिवारों का बिखराव रुकेगा, बल्कि बढ़ी हुई आय का सीधा निवेश बच्चों की अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य पर होगा।
सिर्फ दिहाड़ी नहीं, गांवों में तैयार हो रहा है ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’
यह मिशन सिर्फ मजदूरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम गांवों को आत्मनिर्भर बनाएंगे। योजना के ब्लूप्रिंट में गांवों के समग्र विकास के लिए चार सूत्रीय महायोजना पर काम शुरू हो चुका है:
- जल क्रांति: जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों से सूखे की समस्या का परमानेंट इलाज।
- प्रकृति का संरक्षण: प्राकृतिक संसाधनों और बंजर भूमि का वैज्ञानिक प्रबंधन।
- मजबूत अधोसंरचना: गांवों में पक्की कनेक्टिविटी और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से निर्माण।
- आजीविका एसेट्स: ऐसी स्थायी सरकारी संपत्तियों का विकास, जो भविष्य में भी ग्रामीणों की कमाई का जरिया बनें।
मोदी-साय की जोड़ी पर जताया अटूट भरोसा
ग्रामीणों के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की इस संवेदनशील पहल के लिए गोमती साहू ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति पूरे गांव की तरफ से आभार जताया है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का यह फैसला गांवों के विकास को ‘बुलेट ट्रेन’ की रफ्तार देने वाला साबित होगा।
क्यों दमदार है यह नई नीति?
| पुरानी व्यवस्था | विकसित भारत मिशन (नई व्यवस्था) | सीधा असर |
|---|---|---|
| वर्ष में केवल 100 दिन का रोजगार | अब पूरे 125 दिन का सुनिश्चित काम | साल के 25 अतिरिक्त दिन आर्थिक सुरक्षा |
| सीमित मजदूरी दर | मजदूरी दर में भारी वृद्धि | ग्रामीणों के हाथ में ज्यादा पैसा, बेहतर लाइफस्टाइल |
| रोजगार के अभाव में पलायन | गांव में ही रोजगार की उपलब्धता | पलायन पर रोक, अपनों के बीच रहकर कमाई |
| अस्थायी निर्माण कार्य | स्थायी आजीविका परिसंपत्तियों का विकास |
