कचरा फैलाया तो खैर नहीं! छत्तीसगढ़ के सभी ‘बल्क वेस्ट जनरेटर्स’ पर कसेगा शिकंजा, सीधे दिल्ली से होगी ऑनलाइन निगरानी

नगरीय प्रशासन विभाग का कड़ा हंटर: सभी निगम कमिश्नरों और CMO को अल्टीमेटम, CPCB के नए केंद्रीय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

रायपुर, 6 जुलाई 2026।

छत्तीसगढ़ के शहरों को कचरा मुक्त बनाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार अब बेहद आक्रामक मूड में आ गई है। प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भारी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों यानी ‘बल्क वेस्ट जनरेटर्स’ की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने चक्रव्यूह रच दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एक बेहद सख्त परिपत्र जारी कर राज्य के सभी निकायों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी बड़े कचरा उत्पादकों का पंजीकरण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नए पोर्टल पर अनिवार्य रूप से कराएं।

​विभाग ने साफ कर दिया है कि इस आदेश में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों (CMO) को मिशन मोड पर काम करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है।

1 जून से लागू हुआ नया नियम, अब छिप नहीं पाएंगे ‘कचरा माफिया’

​नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी हाई-अलर्ट परिपत्र के मुताबिक, भारत सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत CPCB ने एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल https://swm.cpcb.gov.in तैयार किया है, जो 1 जून 2026 से पूरे देश में लाइव हो चुका है।

​अब तक स्थानीय स्तर पर निकायों की साठगांठ या ढिलाई के कारण जो बड़े संस्थान कचरा प्रबंधन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे, वे अब सीधे दिल्ली (केंद्रीय बोर्ड) की रडार पर होंगे। छत्तीसगढ़ के सभी चिन्हित बल्क वेस्ट जनरेटर्स का डेटा इस पोर्टल पर अपलोड करना अब कानूनी रूप से बाध्यकारी हो गया है।

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​’बल्क वेस्ट जनरेटर’ की श्रेणी में आने वाले इन प्रमुख संस्थानों पर प्रशासन की पैनी नजर रहेगी:

  • वीआईपी सोसायटियां: बड़े आवासीय अपार्टमेंट और टाउनशिप।
  • कमर्शियल हब: शॉपिंग मॉल्स, मल्टीप्लेक्स और बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स।
  • हॉस्पिटैलिटी सेक्टर: बड़े होटल्स, नामचीन रेस्टोरेंट्स और आलीशान मैरिज लॉन।
  • हेल्थकेयर: निजी व सरकारी अस्पताल और बड़े नर्सिंग होम।
  • एजुकेशन व सरकारी दफ्तर: विश्वविद्यालय, कॉलेज और बड़े शासकीय कार्यालय।

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पारदर्शिता का नया दौर: अब तक बड़े संस्थान कचरा चुपचाप निगम की गाड़ियों में डाल देते थे या खुले में फेंक देते थे। लेकिन इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद हर संस्थान को यह बताना होगा कि रोजाना कितना कचरा निकला और उसका निपटारा (Processing) कैसे किया गया।

सीधी मॉनिटरिंग: छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) सीधे ऑनलाइन मॉनिटरिंग करेंगे। नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर लाखों का ‘इन्वायर्नमेंटल कंपनसेशन’ (पर्यावरणीय जुर्माना) लगाया जाएगा और संस्थान सील भी हो सकते हैं।

निकाय अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही

​नगरीय प्रशासन संचालनालय ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि सभी निकाय अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में तत्काल विशेष सर्वे अभियान चलाएं। यदि किसी क्षेत्र में कोई बल्क वेस्ट जनरेटर बिना रजिस्ट्रेशन के कचरा फैलाता पाया गया, तो संबंधित क्षेत्र के वार्ड प्रभारी, स्वच्छता निरीक्षक और सीएमओ के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस कदम से छत्तीसगढ़ के शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

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