छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग: रायपुर JNM मेडिकल कॉलेज में अब MBBS की 250 सीटें, NMC से मिली फाइनल मंजूरी

रायपुर, 11 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ के उन हजारों युवाओं के लिए आज का दिन एक उत्सव जैसा है जो डॉक्टर बनकर मानवता की सेवा करने का ख्वाब देख रहे हैं। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित और गौरवशाली पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर के खाते में एक और बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी जुड़ गई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने कॉलेज में 20 नई MBBS सीटों की बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के साथ ही अब यहाँ सीटों का आंकड़ा 230 से छलांग लगाकर पूरे 250 पर पहुँच गया है।

​इसी सत्र (2026-27) से लागू होगा फैसला, नीट (NEET) छात्रों में खुशी की लहर

​एनएमसी (NMC) की ओर से 10 जुलाई 2026 को इसके लिए बकायदा आधिकारिक अनुमति पत्र (Letter of Permission) जारी कर दिया गया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी से संबद्ध इस संस्थान में इसी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही सभी 250 सीटों पर दाखिले शुरू हो जाएंगे। इस फैसले से प्रदेश के नीट (NEET) अभ्यर्थियों को अपने ही राज्य में डॉक्टर बनने के ज्यादा अवसर मिलेंगे, जिससे कट-ऑफ में भी स्थानीय छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

​सफरनामा: 60 सीटों की ‘नींव’ से 250 के ‘शिखर’ तक

​63 साल पहले बोया गया एक छोटा सा पौधा आज विशाल बरगद बन चुका है। साल 1963 में महज 60 सीटों के साथ शुरू हुए इस कॉलेज ने छत्तीसगढ़ को देश के नक्शे पर एक नई पहचान दी है। इसकी विकास यात्रा कुछ इस तरह रही है:

वर्षसीटों की संख्याविकास का पड़ाव
196360 सीटेंस्थापना के साथ सफर की शुरुआत
100 सीटेंशुरुआती विस्तार
2009150 सीटेंबढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों के साथ विस्तार
2019180 सीटेंइंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूती
2023230 सीटेंचिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव
2026250 सीटेंऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर संस्थान

“भविष्य के छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव” — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

​इस शानदार उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों और मेडिकल छात्रों को बधाई देते हुए कहा:

​”यह सिर्फ सीटों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के समृद्ध होते भविष्य की गारंटी है। हमारी सरकार युवाओं को उनके अपने राज्य में ही विश्वस्तरीय शिक्षा और सुविधाएं देने के लिए संकल्पित है। अब हमारे राज्य के बेटे-बेटियां यहीं रहकर डॉक्टर बनेंगे और आगे चलकर छत्तीसगढ़ के कोने-कोने को अपनी सेवाएं देकर स्वस्थ बनाएंगे।”

​वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और लगातार किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य का स्वास्थ्य विभाग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

​क्यों ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा यह ऐतिहासिक निर्णय?

  • प्रतिभाओं का सम्मान: अब राज्य के टॉप रैंकर्स को मजबूरी में दूसरे राज्यों या विदेशों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
  • गरीब मरीजों को संजीवनी: जेएनएम मेडिकल कॉलेज से छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल (मेकाहारा) जुड़ा हुआ है। सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से यहाँ आने वाले हजारों गरीब मरीजों को और भी बेहतर व त्वरित इलाज मिल सकेगा।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती: हर साल यहाँ से 250 डॉक्टर पास आउट होंगे, जिससे आने वाले समय में राज्य के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

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