आपदाओं से निपटने में ढाल बनेगी स्पेस टेक्नोलॉजी: इंडिया स्पेस लैब की राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए पंजीयन शुरू

‘रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट’ विषय पर ऑनलाइन मंथन; 30 जुलाई तक करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

रायपुर, 16 जुलाई 2026।
भविष्य की आपदाओं से निपटने और तकनीक के दम पर जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में एक बड़ी पहल होने जा रही है। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस (12 अगस्त) के गरिमामयी अवसर पर इंडिया स्पेस लैब द्वारा “रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट” विषय पर एक भव्य ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों को आधुनिक अंतरिक्ष तकनीकों से लैस करना है।
इस कार्यशाला में शामिल होने के लिए ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

🛰️ क्यों खास है यह कार्यशाला? तकनीक की ताकत से थमेगी तबाही!

आज के दौर में जब बाढ़, भूस्खलन, और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएं तेजी से बढ़ रही हैं, तब स्पेस टेक्नोलॉजी और जियो-स्पेशियल टूल्स ही हमारे सबसे बड़े सुरक्षा कवच हैं। इस कार्यशाला में विषय-विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक केस स्टडी के साथ निम्नलिखित आधुनिक विषयों पर गहन व्याख्यान दिए जाएंगे:

  • रिमोट सेंसिंग और जीआईएस (GIS): आपदा के पूर्व सटीक अनुमान और योजना बनाने की तकनीक।
  • जियो-एआई (GeoAI) और मशीन लर्निंग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए आपदा संभावित क्षेत्रों का त्वरित विश्लेषण।
  • ड्रोन मैपिंग: संकट के समय दुर्गम इलाकों की लाइव मॉनिटरिंग और राहत कार्य।
  • अर्थ ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी: उपग्रहों के माध्यम से पृथ्वी की हलचलों पर पैनी नजर।

🎓 छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक और प्रशासनिक संस्थानों से विशेष अपील

आयोजकों ने छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (DDMA), शासकीय विभागों, शोध संस्थानों और स्वायत्त संस्थाओं से इस कार्यशाला की जानकारी को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की अपील की है।

विभागों से आग्रह: इस महत्वपूर्ण सूचना को विभागीय वेबसाइटों, पोर्टलों, सूचना पट्टों और सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्राथमिकता से प्रदर्शित किया जाए ताकि राज्य के कोने-कोने से प्रतिभागी इस ऐतिहासिक ज्ञान-यज्ञ का हिस्सा बन सकें।

🎯 कौन-कौन हो सकता है शामिल?

यह कार्यशाला बहु-आयामी है और इसमें विभिन्न क्षेत्रों के लोग हिस्सा ले सकते हैं:

  1. विद्यार्थी एवं शोधकर्ता: जो अंतरिक्ष विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
  2. शिक्षक एवं शिक्षाविद: तकनीक को शिक्षण और रिसर्च में शामिल करने के लिए।
  3. सरकारी अधिकारी व आपदा प्रबंधन टीमें: जमीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने के लिए।

💡 वैज्ञानिक सोच को मिलेगा नया पंख, मिलेगा ई-सर्टिफिकेट

आयोजकों का मानना है कि इस अनूठी पहल से देश के युवाओं और अधिकारियों में न केवल वैज्ञानिक सोच विकसित होगी, बल्कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) की दिशा में भारत एक कदम और आगे बढ़ेगा। सफलतापूर्वक कार्यशाला पूर्ण करने वाले सभी पंजीकृत प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र (E-Certificate) प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

📝 महत्वपूर्ण जानकारियां एक नजर में:

विवरणमहत्वपूर्ण जानकारी
आयोजकइंडिया स्पेस लैब
कार्यशाला का विषयरिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट
विशेष अवसरराष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस (12 अगस्त)
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि30 जुलाई 2026
रजिस्ट्रेशन लिंकisl.ac.in/workshop/
पात्रताछात्र, शोधकर्ता, शिक्षक, शासकीय अधिकारी एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े लोग
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