चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किया उद्घाटन; 19 विशेष खंडपीठों में हुई सुनवाई
‘हाइब्रिड मोड’ बना मददगार, आपसी रजामंदी से खत्म हुई पक्षकारों के बीच वर्षों की कड़वाहट
रायपुर, 19 जुलाई 2026।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत आज रायपुर जिला न्यायालय में चेक बाउंस (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम) के मामलों के निपटारे के लिए एक ‘विशेष लोक अदालत’ का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस महा-अदालत में आपसी समझौते और राजीनामे के आधार पर एक ही दिन में रिकॉर्ड 847 मामलों का सौहार्दपूर्ण निपटारा किया गया। इस दौरान कुल 22,79,86,157 रुपये (बाइस करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम राशि का सेटलमेंट हुआ, जो न्यायिक इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने किया शुभारंभ
इस विशेष लोक अदालत का भव्य उद्घाटन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम के दौरान रायपुर जिला न्यायालय में मुख्य रूप से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा, अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) विनय प्रधान, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद कुमार सिंह और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अविनाश कुमार दुबे सहित भारी संख्या में न्यायाधीशगण, अधिवक्ता और पक्षकार उपस्थित रहे।
एक नज़र में लोक अदालत के बड़े आंकड़े:
| विवरण | आंकड़े/जानकारी |
|---|---|
| कुल गठित विशेष खंडपीठ (बेंच) | 19 |
| सुनवाई के लिए रखे गए कुल मामले | लगभग 1800 |
| आपसी समझौते से निपटाए गए मामले | 847 |
| कुल समझौता राशि | ₹22,79,86,157/- (22.79 करोड़ रुपये) |
| सुनवाई का माध्यम | हाइब्रिड मोड (भौतिक एवं वर्चुअल) |
19 खंडपीठों में 1800 मामलों पर हुआ मंथन
चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से रायपुर जिला न्यायालय परिसर में 19 विशेष खंडपीठों का गठन किया गया था। इन पीठों के समक्ष करीब 1800 लंबित मामलों को रखा गया था। जजों और विधिक सलाहकारों की सूझबूझ से दोनों पक्षों को समझाकर कुल 847 प्रकरणों को हमेशा के लिए बंद करा दिया गया।
क्यों खास है लोक अदालत का यह फैसला?
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निपटारे का समाज पर बहुत गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है:
- अंतिम होता है आदेश: लोक अदालत के फैसले के खिलाफ किसी भी उच्च अदालत में अपील का प्रावधान नहीं होता है। यहाँ लिया गया निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होता है, जिससे अदालतों का चक्कर लगाने का झंझट खत्म हो जाता है।
- कटुता और वैमनस्यता का अंत: सालों से कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई से उपजी आपसी कड़वाहट लोक अदालत की मेज पर बैठकर हाथ मिलाने के साथ ही हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
- समय और धन की बचत: दोनों पक्षों का कीमती समय और वकीलों व अदालती प्रक्रिया में होने वाला भारी-भरकम खर्च बच जाता है।
‘हाइब्रिड मोड’ से मिली बड़ी सफलता
इस बार लोक अदालत की सफलता में तकनीकी रूप से ‘हाइब्रिड मोड’ (Physical + Virtual) ने बेहद अहम भूमिका निभाई। इस सुविधा के कारण जो पक्षकार शारीरिक रूप से कोर्ट में उपस्थित होने में असमर्थ थे, वे देश-दुनिया के किसी भी कोने से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे कोर्ट से जुड़े और अपने मामलों का निपटारा कराया। घर बैठे या दफ्तर से ही वर्चुअल रूप से उपस्थित होने की इस सहूलियत के चलते ही इस बार निराकरण होने वाले प्रकरणों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है।
