विशेष संवाददाता | 26 जुलाई रायपुर
छत्तीसगढ़: राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख सामने आया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।

मोदी की ‘गारंटी’ पर सीबीआई की स्ट्राइक
विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के युवाओं से वादा किया था कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनते ही सीजीपीएससी घोटाले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। सत्ता संभालते ही साय सरकार ने इस वादे पर अमल करते हुए जांच का जिम्मा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा:
“पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हमारे प्रदेश के बेटा-बेटियों के भविष्य के साथ सीजीपीएससी के माध्यम से खिलवाड़ किया गया। इसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ था। विधानसभा चुनाव के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने युवाओं से वादा किया था कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर इस मामले की जांच कराई जाएगी। आज सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है और उस समय के चेयरमैन सहित इस प्रकरण में शामिल अन्य दोषियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा रही है।”
कसता जा रहा है शिकंजा: आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष समेत कई गिरफ्तार
सीबीआई की जांच शुरू होते ही इस मामले से जुड़े कई बड़े चेहरे बेनकाब हो चुके हैं। जांच एजेंसी ने तत्कालीन सीजीपीएससी चेयरमैन समेत कई रसूखदारों और बिचौलियों पर नकेल कस दी है। आरोप हैं कि पिछली सरकार के दौरान नेताओं, अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाकर मेधावी युवाओं का हक मारा गया था।
मुख्यमंत्री साय ने अपराध और भ्रष्टाचार पर शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति दोहराते हुए कहा:
“किसी भी क्षेत्र में यदि कोई अपराध करेगा, तो उस अपराधी के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”प्रदेश के लाखों युवाओं में जगी न्याय की उम्मीद
सीजीपीएससी में हुई धांधली के खिलाफ प्रदेश भर के युवाओं और अभ्यर्थियों ने लंबा संघर्ष किया था। सीबीआई की त्वरित कार्रवाई और मुख्यमंत्री के इस सख्त बयान से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों और लाखों युवाओं में एक बार फिर न्याय और पारदर्शी व्यवस्था की उम्मीद जगी है। सरकार के इस रुख से साफ है कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
