काली हल्दी के ‘एंडोफाइटिक कवक’ से बनेगी कैंसर और संक्रमण रोधी दवाएँ: सुरभि पांडेय को मिली PhD की उपाधि

* गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूरल टेक्नोलॉजी विभाग की शोध छात्रा सुरभि ने डॉ. भास्कर चौरसिया के मार्गदर्शन में पूरा किया शोध

* जांजगीर की बेटी के इस शोध से चिकित्सा, कृषि और बायो-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति आने की उम्मीद; एक्सटर्नल प्रोफेसर ने की जमकर तारीफ

रायपुर / जांजगीर | 27 जुलाई 2026
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) के रूरल टेक्नोलॉजी एवं सोशल डेवलपमेंट विभाग की शोध छात्रा कु. सुरभि पांडेय को उनकी उत्कृष्ट शोध पर डॉक्टरेट (PhD) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। सुरभि ने अपना यह ऐतिहासिक शोध कार्य विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर चौरसिया के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया।
सुरभि के शोध का विषय “स्टडीस ऑन आइसोलेशन एंड आइडेंटिफिकेशन ऑफ एंडोफिटिक फंगई एंड देयर बायोएक्टिव मॉलिक्यूल्स फ्रॉम कुरकुमा कैसिया रोक्सब (Curcuma caesia Roxb.)” था, जो पादप कवक (Plant Fungi) और उनके जैव-सक्रिय (Bioactive) अणुओं की विशिष्ट पहचान पर केंद्रित है। ग्रामीण प्रौद्योगिकी और आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के संगम पर आधारित यह शोध चिकित्सा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

शोध की मुख्य विशेषताएँ और बड़ी उपलब्धियाँ

  • काली हल्दी (Curcuma caesia) पर गहन अध्ययन: जांजगीर निवासी सुरभि पांडेय ने अपने शोध में बताया कि पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी ‘काली हल्दी’ के पत्तों एवं प्रकंद (Rhizome) से 22 एंडोफाइटिक कवकीय आइसोलेट्स प्राप्त किए गए।
  • अधुनिक तकनीकों से पहचान: इन कवकों की सटीक पहचान आकृतिक (Morphological) और MALDI-TOF विश्लेषण तकनीक से की गई।
  • HER2 प्रोटीन और मॉलिक्यूलर डॉकिंग: पौधे और कवकीय अर्कों का GC-MS विश्लेषण कर विभिन्न बायोएक्टिव यौगिकों की पहचान की गई। इन यौगिकों की कैंसर रोधी क्षमता का आकलन स्तन कैंसर से जुड़े HER2 प्रोटीन के विरुद्ध मॉलिक्यूलर डॉकिंग (Molecular Docking) से किया गया, जिसमें कई यौगिकों ने बेहद संतोषजनक और प्रभावी बाइंडिंग क्षमता प्रदर्शित की।
  • कैंसर व नए एंटीबायोटिक्स में उपयोग: शोध से स्पष्ट हुआ है कि एंडोफाइटिक कवक बिना पौधे को नुकसान पहुँचाए उनके ऊतकों में रहते हैं। ये अल्कलॉइड्स, टेरपेनोइड्स और फिनोलिक यौगिकों के प्रमुख स्रोत हैं, जिनका भविष्य में कैंसर, गंभीर संक्रमण रोधी दवाओं और बायोटेक उत्पादों के निर्माण में व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है।

“एंडोफाइटिक कवक पौधों के भीतर रहकर ऐसे शक्तिशाली बायोएक्टिव मॉलिक्यूल्स बनाते हैं, जो भविष्य में कैंसर और लाइलाज संक्रमणों के खिलाफ नई औषधियों के विकास में क्रांतिकारी साबित होंगे।”

डॉ. सुरभि पांडेय

एक्सटर्नल प्रोफेसर ने की सराहना, माता-पिता का रहा संबल

सुरभि के फाइनल पीएचडी प्रेजेंटेशन से बाहर से आए मुख्य एक्सटर्नल प्रोफेसर बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने शोध की उच्च गुणवत्ता और जन-कल्याणकारी उपयोगिता की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए सुरभि को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
जांजगीर की होनहार बेटी सुरभि ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक डॉ. भास्कर चौरसिया, विश्वविद्यालय परिवार तथा अपने माता-पिता को दिया है। सुरभि की माता श्रीमती पुष्पा पांडेय (शिक्षिका) एवं पिता श्री विजय पांडेय ने हर कदम पर अपनी बेटी की मेहनत और सपनों को पूरा करने में अटूट सहयोग दिया। सुरभि की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र और विश्वविद्यालय परिसर में हर्ष का माहौल है।

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